मरीजों ने पूछा इलाज का हिसाब, स्वास्थ्य विभाग पर रौब दिखाने का आरोप सतनामी समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी, 4 जून तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा धरना-प्रदर्शन
मरीजों ने पूछा इलाज का हिसाब, स्वास्थ्य विभाग पर रौब दिखाने का आरोप सतनामी समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी, 4 जून तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा धरना-प्रदर्शन

मांगना पड़ा भारी! किडनी मरीज के परिजन को BMO की कथित धमकी, सुपेबेड़ा में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ फूटा आक्रोश
मरीजों ने पूछा इलाज का हिसाब, स्वास्थ्य विभाग पर रौब दिखाने का आरोप
सतनामी समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी, 4 जून तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा धरना-प्रदर्शन

गरियाबंद/देवभोग। किडनी प्रभावित गांव सुपेबेड़ा में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। किडनी पीड़ित महिला के लिए ब्लड बढ़ाने वाला इंजेक्शन मांगने पहुंचे सतनामी समाज सुपेबेड़ा के अध्यक्ष टंकधर आंडलिय ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू पर अभद्र व्यवहार, धमकी और मरीजों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
इस संबंध में टंकधर आंडलिय ने कलेक्टर, एसडीएम, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार एवं थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
इंजेक्शन की जानकारी मांगने पर विवाद
शिकायत के अनुसार, टंकधर आंडलिय की पत्नी प्रेमबाई आंडलिय किडनी रोग से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित रूप से EPO 10,000 IU ब्लड बढ़ाने वाले इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है। शासन द्वारा सुपेबेड़ा के किडनी मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन आरोप है कि मरीजों को समय पर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है।
रविवार सुबह जब टंकधर आंडलिय अपनी पत्नी के लिए इंजेक्शन की उपलब्धता की जानकारी लेने अस्पताल पहुंचे और बीएमओ से पूछा कि किडनी मरीजों के लिए आने वाले इंजेक्शन मरीजों तक क्यों नहीं पहुंच रहे हैं, तब कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्हें धमकाया गया तथा थप्पड़ मारने जैसी बातें कही गईं। साथ ही किडनी मरीजों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का भी आरोप लगाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के दावों पर उठे सवाल
सुपेबेड़ा वर्षों से किडनी त्रासदी के लिए देशभर में चर्चा का विषय रहा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार बेहतर इलाज, विशेष चिकित्सा सुविधाएं और मरीजों की देखभाल के दावे करते रहे हैं। ऐसे में यदि मरीज या उनके परिजन दवा और उपचार संबंधी जानकारी मांगने पर कथित रूप से धमकियों का सामना करते हैं, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों को अपने इलाज और दवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। सरकारी अस्पतालों में जवाब मांगना किसी भी स्थिति में अपराध नहीं माना जा सकता।
4 जून तक कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
सतनामी समाज द्वारा प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 4 जून 2026 तक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज के लोग धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
सुपेबेड़ा के किडनी मरीज वर्षों से जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और समय पर उपचार सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय होगा।
अब क्षेत्र की जनता और मरीज परिवारों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि उनकी शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाता है।




