Uncategorized

चिरायु योजना बनी जीवनदायिनी: रेटिनोब्लास्टोमा से जूझ रही 3 वर्षीय करीना का एम्स रायपुर में निशुल्क सफल इलाज

चिरायु योजना बनी जीवनदायिनी: रेटिनोब्लास्टोमा से जूझ रही 3 वर्षीय करीना का एम्स रायपुर में निशुल्क सफल इलाज

प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

चिरायु योजना बनी जीवनदायिनी: रेटिनोब्लास्टोमा से जूझ रही 3 वर्षीय करीना का एम्स रायपुर में निशुल्क सफल इलाज

 

गरियाबंद के वनांचल क्षेत्र की आदिवासी परिवार की मासूम को मिली नई जिंदगी, चिरायु दल की सजगता से समय पर हुई बीमारी की पहचान

 

गरियाबंद/मैनपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु योजना वनांचल और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए स्वास्थ्य की नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है। इसी योजना के तहत गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के ग्राम साहेबिनकछार की रहने वाली 3 वर्षीय मासूम करीना नागेश को आंखों की गंभीर बीमारी रेटिनोब्लास्टोमा से मुक्त कराकर नया जीवन मिला है।

 

आदिवासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली करीना की बीमारी की पहचान चिरायु दल ‘अ’ मैनपुर की सक्रियता और स्वास्थ्य जांच के दौरान हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्ची के उपचार के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई और उसे एम्स रायपुर में निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया। उपचार के बाद बच्ची स्वस्थ होकर अपने गृह ग्राम लौट चुकी है।

 

चिरायु दल की सजगता से समय पर हुई बीमारी की पहचान

 

जानकारी के अनुसार, चिरायु दल ‘अ’ मैनपुर क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और गंभीर बीमारियों की पहचान के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इसी दौरान टीम की नजर करीना की स्वास्थ्य समस्या पर पड़ी।

 

जांच के बाद बच्ची में आंखों से संबंधित गंभीर बीमारी रेटिनोब्लास्टोमा की पुष्टि हुई। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बिना देरी किए बच्ची के बेहतर उपचार की दिशा में आवश्यक कदम उठाए।

 

समय पर बीमारी की पहचान होने के बाद करीना को उच्च स्तरीय उपचार के लिए एम्स रायपुर भेजा गया, जहां उसका निशुल्क और सफल उपचार हुआ।

 

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निभाई अहम भूमिका

 

करीना के उपचार की प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिरायु दल की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा खंड चिकित्सा अधिकारी के मार्गदर्शन में चिरायु दल ‘अ’ ने बच्ची की पहचान से लेकर उपचार तक लगातार प्रयास किए।

 

चिरायु दल के प्रमुख डॉ. रमन माथुर, तुलसीदास मानिकपुरी और ब्रिज कंवर ने बच्ची के स्वास्थ्य परीक्षण, बीमारी की पहचान, उपचार के लिए रेफर किए जाने और इलाज की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।

 

स्वास्थ्य विभाग की टीम की निगरानी में बच्ची का उपचार पूरा हुआ और सफल इलाज के बाद उसे सुरक्षित उसके गृह ग्राम पहुंचाया गया।

 

सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का भी मिला सहयोग

 

करीना के उपचार की प्रक्रिया को सफल बनाने में स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और समाजजनों का भी सहयोग रहा।

 

इस पुनीत कार्य में जनपद सभापति देवभोग देवेंद्र सिंह ठाकुर, आदिवासी राजगोंड समाज केंद्र सभा झरगांव, ग्रुप सभा कोयबा के समाजजनों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग बताया गया है।

 

दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में रहने वाले परिवार के लिए बच्ची के उपचार की प्रक्रिया में इस सहयोग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

निशुल्क इलाज से परिवार को मिली बड़ी राहत

 

करीना के परिवार के लिए बच्ची की गंभीर बीमारी का इलाज कराना आसान नहीं था। आर्थिक रूप से कमजोर और वनांचल क्षेत्र में रहने वाले परिवार के लिए बड़े शहर में जाकर महंगे इलाज की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती हो सकती थी।

 

ऐसे में चिरायु योजना के माध्यम से बच्ची की बीमारी की पहचान होने और एम्स रायपुर में निशुल्क उपचार मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली।

 

सफल उपचार के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की टीम करीना को उसके गृह ग्राम लेकर पहुंची, तो परिवार में खुशी का माहौल था।

 

परिजनों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग का जताया आभार

 

बच्ची के सफल उपचार के बाद करीना के परिजनों ने छत्तीसगढ़ शासन, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार जताया। परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम की सक्रियता और चिरायु योजना के माध्यम से उनकी बच्ची को समय पर उपचार मिल सका।

 

परिवार के लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि उनकी मासूम बेटी को स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाने की एक बड़ी उम्मीद साबित हुई।

 

वनांचल के बच्चों के लिए चिरायु योजना की अहम भूमिका

 

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित चिरायु योजना का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकार, बीमारियों, कमियों और विकास संबंधी समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है।

 

करीना नागेश का मामला इस बात का उदाहरण है कि यदि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान गंभीर बीमारी की समय पर पहचान हो और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा से जोड़ा जाए, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार संभव हो सकता है।

 

गरियाबंद जैसे वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा बच्चों तक पहुंचकर जांच करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाना ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सहायता साबित हो रही है।

 

करीना की स्वस्थ वापसी ने उसके परिवार को राहत दी है और क्षेत्र में चिरायु योजना के माध्यम से बच्चों को मिल शरही स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता को भी सामने रखा है।

*हमारे यूट्यूब चैनल Deobhog news express को सब्सक्राइब करें*

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
error: Content is protected !!