आधी रात को सड़क पर तड़प रहा था बेजुबान, मसीहा बनकर पहुंचे आकाश सिंह – जन सामर्थ्य सेवा संस्थान*
आधी रात को सड़क पर तड़प रहा था बेजुबान, मसीहा बनकर पहुंचे आकाश सिंह - जन सामर्थ्य सेवा संस्थान*

*आधी रात को सड़क पर तड़प रहा था बेजुबान, मसीहा बनकर पहुंचे आकाश सिंह – जन सामर्थ्य सेवा संस्थान*
प्रयागराज मंडल व्योरो प्रशांत दुबे कि रिपोर्ट
*प्रतापगढ़।* रात के 1 बजे जब पूरा शहर गहरी नींद में सो रहा था, तब सड़क के किनारे एक बेजुबान दर्द से तड़प रहा था। सड़क हादसे में बुरी तरह घायल होने के कारण उसकी हड्डी टूट चुकी थी और वह अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।
सूचना मिलते ही जन सामर्थ्य सेवा संस्थान के सेवादार युवा आकाश सिंहअपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। सुनसान रात में उन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए घायल सांड को सहलाया और अपनी सामर्थ्य अनुसार यथासंभव प्राथमिक उपचार व मरहम-पट्टी की।
स्थाई गौशाला और संसाधनों के अभाव में फिलहाल उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ना पड़ा, लेकिन टीम ने सुबह फिर से उसकी देखभाल करने की बात कही है।
इस मौके पर सेवादार आकाश सिंह ने कहा – _”जब बेजुबान दर्द में हों, तो हमारी नींद से ज्यादा जरूरी उनकी जिंदगी है। सूचना मिलते ही हम कोशिश करते हैं कि तुरंत मौके पर पहुंचकर उनकी मदद कर सकें।”_
उल्लेखनीय है कि जन सामर्थ्य सेवा संस्थान लगातार जरूरतमंद लोगों, फुटपाथ पर बेसहारा पड़े हुए इंसानों को भोजन, एवं घायल, बीमार और बेसहारा गोवंश व बेजुबानों की सेवा में जुटा है। अब संस्थान ने ऐसे बेसहारा बेजुबानों के लिए एक स्थाई गौशाला के निर्माण का संकल्प लिया है, ताकि कोई भी बेजुबान इलाज के अभाव में दम न तोड़े।
संस्थान ने जनमानस से अपील की है कि आप भी इस सेवा यज्ञ से जुड़ें और अपने सामर्थ्य अनुसार सेवा-सहयोग कर पुण्य के भागी बनें।
सेवा ही परम धर्म है।
संपर्क : जन सामर्थ्य सेवा संस्थान, प्रतापगढ़




