अब मेले तक सीमित नहीं रहेगा अजगरा, यक्ष-युधिष्ठिर संवाद परंपरा से जुड़ेगा ‘द ग्रेट अजगरा डिबेट’*
अब मेले तक सीमित नहीं रहेगा अजगरा, यक्ष-युधिष्ठिर संवाद परंपरा से जुड़ेगा 'द ग्रेट अजगरा डिबेट'*

*अब मेले तक सीमित नहीं रहेगा अजगरा, यक्ष-युधिष्ठिर संवाद परंपरा से जुड़ेगा ‘द ग्रेट अजगरा डिबेट’*
जिला संवाददाता प्रतापगढ़ गुलाबचन्द्र जायसवाल कि रिपोर्ट
जनपद की विशिष्ट पौराणिक एवं सांस्कृतिक धरोहर अजगरा धाम अब एक नए रूप में देश के सामने आने जा रहा है। स्थानीय परंपरा और सांस्कृतिक अभिलेखों के अनुसार अजगरा को महाभारतकालीन यक्ष-युधिष्ठिर संवाद से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान युधिष्ठिर का यक्ष से संवाद इसी स्थल पर हुआ था। यक्ष द्वारा पूछे गए धर्म, कर्तव्य, सत्य, मृत्यु, सुख और आचरण से जुड़े गहन प्रश्न आज भी भारतीय चिंतन परंपरा में प्रतिष्ठित हैं। आज भी यहां पौराणिक सरोवर, वृक्ष-अवशेष और धार्मिक परंपराएं विद्यमान हैं।
अब तक अजगरा महोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मेले के रूप में आयोजित होता रहा है। लेकिन अब प्रशासन अजगरा को वार्षिक मेले तक सीमित न रखकर *भारतीय संवाद, तर्क और नैतिक चिंतन की जीवंत परंपरा के केंद्र* के रूप में पुनर्स्थापित करने जा रहा है।
इसी कड़ी में अजगरा महोत्सव-2026 में *’THE GREAT AJGARA DEBATE’* नामक जन-केंद्रित, लोकतांत्रिक वाद-विवाद श्रृंखला आयोजित होगी।
इस वर्ष का केंद्रीय विचार है – *”यक्ष का प्रश्न, समाज का उत्तर”*। महाभारत के वही शाश्वत प्रश्न आज नए रूप में हमारे सामने हैं, जैसे – सुख क्या है? सफलता क्या है? मनुष्य का सबसे बड़ा भय क्या है? सत्य और सुविधा में किसे चुनें? विकास और प्रकृति में संतुलन कैसे हो? क्या तकनीक स्वतंत्र बना रही है? क्या लोकतंत्र केवल मतदान है?
प्रशासन का कहना है कि इस बार यह नहीं पूछा जाएगा कि “सही उत्तर क्या है?”, बल्कि यह समझा जाएगा कि *आज का समाज किस उत्तर को सही मानता है और क्यों?* इसके जरिए ग्रामीण और नगरीय समाज के बदलते मूल्य और नैतिक दृष्टिकोण सामने आएंगे।



