उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में रात का सफर प्रतिबंधित, तोरेंगा नाका पर लगी वाहनों की लंबी कतार
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में रात का सफर प्रतिबंधित, तोरेंगा नाका पर लगी वाहनों की लंबी कतार

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में रात का सफर प्रतिबंधित, तोरेंगा नाका पर लगी वाहनों की लंबी कतार
शाम के बाद देवभोग–रायपुर मार्ग पर बढ़ी यात्रियों की परेशानी, वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से होकर गुजरने वाले देवभोग–रायपुर मार्ग पर रात के समय वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित किए जाने के बाद यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सोमवार शाम प्रतिबंध लागू होने के बाद तोरेंगा नाका के पास वाहनों की लंबी कतार लग गई। अचानक मार्ग पर आवाजाही रोके जाने से यात्रियों और राहगीरों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले मार्ग पर रात के समय यातायात नियंत्रित किया जा रहा है। उपलब्ध स्थानीय सूचना में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, हालिया प्रकाशित रिपोर्टों में प्रतिबंध का समय शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे बताया गया है, इसलिए यात्रियों को स्थानीय प्रशासन/वन विभाग के नवीनतम निर्देश के अनुसार ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए। �
तोरेंगा नाका पर वाहनों की लगी लंबी कतार
प्रतिबंध लागू होने के बाद शाम होते ही तोरेंगा नाका के आसपास बड़ी संख्या में वाहन रुक गए। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। अचानक आवागमन बंद होने से कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा।
देवभोग क्षेत्र को रायपुर और गरियाबंद से जोड़ने वाला यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, व्यापार, इलाज, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए इस मार्ग से आवागमन करते हैं। ऐसे में रात के समय मार्ग बंद होने का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है।
वन्यजीवों की सुरक्षा बनी प्रतिबंध की मुख्य वजह
वन विभाग और अभ्यारण्य प्रबंधन की ओर से रात के समय वाहनों की आवाजाही रोकने के पीछे मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना बताया गया है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है और यहां वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जाते हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह क्षेत्र वर्ष 2009 में टाइगर रिजर्व के रूप में गठित हुआ था। �
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ समय में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए रात में वाहनों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ाई गई है। �
इंदागांव और तोरेंगा बैरियर पर CCTV से निगरानी
रात के समय प्रतिबंध को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए इंदागांव और तोरेंगा बैरियर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। दोनों स्थानों पर CCTV कैमरों के माध्यम से वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।
ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए यह भी देखा जा रहा है कि प्रतिबंधित समय में कोई वाहन बैरियर पार न करे। इससे नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निगरानी और आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। �
रायपुर–देवभोग मार्ग पर यात्री बसों पर भी असर
रात के समय प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ने की संभावना है जो शाम के बाद रायपुर से देवभोग या देवभोग से रायपुर की ओर सफर करते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शाम के बाद इस मार्ग पर कई यात्री बसों का संचालन होता है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में नौकरीपेशा और व्यवसाय से जुड़े लोग गरियाबंद जिला मुख्यालय तथा रायपुर में दिनभर का काम पूरा करने के बाद शाम या रात में वापस देवभोग क्षेत्र की ओर लौटते हैं। ऐसे यात्रियों को अब अपने सफर का समय बदलना पड़ सकता है अथवा वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पड़ सकता है।
हालिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि शाम 7 बजे के बाद रायपुर से देवभोग की ओर जाने वाली पांच से अधिक यात्री बसें इस मार्ग का इस्तेमाल करती हैं। �
आपातकालीन मामलों में राहत
रिपोर्टों के अनुसार प्रतिबंध के बावजूद मेडिकल अथवा जीवन बचाने वाली आपात स्थिति में आवश्यक वाहनों को अनुमति दिए जाने की व्यवस्था है। �
इस व्यवस्था का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ गंभीर आपात स्थिति में लोगों को आवश्यक सेवाओं से वंचित होने से बचाना है।
यात्रियों को यात्रा से पहले समय की जानकारी लेना जरूरी
रात में यात्रा करने वाले लोगों के लिए अब सबसे जरूरी है कि वे रवाना होने से पहले बैरियर पर लागू प्रतिबंध के समय की जानकारी ले लें। खासकर देवभोग, गरियाबंद और रायपुर के बीच रात में आने-जाने वाले यात्रियों को अपनी यात्रा का समय उसी अनुसार तय करना होगा।
उदंती-सीतानदी क्षेत्र में लागू यह व्यवस्था वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके कारण रोजाना आवागमन करने वाले लोगों की दिनचर्या और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ना तय है। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ यात्रियों को स्पष्ट सूचना और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए।


