गरियाबंद

गरियाबंद में तीन लाख ईनामी माओवादी हुए आत्मसमर्पित

पुलिस की लगातार समझाइश और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हिंसा का रास्ता

प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

 

गरियाबंद-:नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत गरियाबंद पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। जिले के डीआईजी नक्सल ऑपरेशन डिवीजन क्षेत्र के अंतर्गत सक्रिय तीन लाख ईनामी माओवादी नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। शासन की पुनर्वास नीति और पुलिस की सतत् समझाइश से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने हिंसा का मार्ग छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

 

आत्मसमर्पित माओवादियों में —

1️⃣ नागेश उर्फ राम कवासी, 01 लाख ईनामी माओवादी

2️⃣ जनी उर्फ देवे मड़कम, 01 लाख ईनामी माओवादी

3️⃣ मनीला उर्फ सुंदरि कवासी, 01 लाख ईनामी माओवादी शामिल हैं।

 

तीनों माओवादी लंबे समय से बीजापुर और गरियाबंद-ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय थे तथा पुलिस बल पर कई नक्सली घटनाओं में शामिल रहे।

 

नागेश उर्फ राम कवासी वर्ष 2022 में माओवादियों के पीएलजीए संगठन में भर्ती हुआ था और कई नक्सली घटनाओं में उसकी भूमिका रही।

 

जनी उर्फ देवे मड़कम वर्ष 2016 से माओवादी संगठन से जुड़ी थी और विभिन्न वारदातों में शामिल रही।

 

मनीला उर्फ सुंदरि कवासी जुलाई 2020 से माओवादी संगठन में कार्यरत थी और सीतामपल्ली क्षेत्र समिति की सक्रिय सदस्य रही।

पुलिस के अनुसार, तीनों माओवादियों ने बताया कि संगठन में महिलाओं और युवाओं के साथ अत्याचार, शोषण और भय का माहौल है। निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, पुलिस मुठभेड़ों में साथियों की लगातार मौत और शासन की विकास योजनाओं से कटे रहने के कारण उन्होंने आत्मसमर्पण का फैसला लिया।

 

गरियाबंद पुलिस अधीक्षक, नक्सल उन्मूलन अभियान के अंतर्गत कार्यरत इकाइयाँ — E30, STF, कोबरा 207 एवं CRPF — की संयुक्त कार्रवाई में यह आत्मसमर्पण संभव हुआ।

तीनों माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, आवास, रोजगार और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

गरियाबंद पुलिस ने सक्रिय माओवादियों से पुनः अपील की है कि वे हिंसा छोड़ शांति और विकास के रास्ते पर लौटें तथा नजदीकी थाना, चौकी या कैंप में आत्मसमर्पण करें। आत्मसमर्पण हेतु संपर्क नंबर — नक्सल सेल गरियाबंद: 94792-27805

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