
झोपड़ी में चल रही आंगनवाड़ी, खतरे में नौनिहालों का भविष्य; ग्रामीणों ने की पक्के भवन की मांग
गरियाबंद। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के सरगीगुड़ा गांव की तस्वीरें सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं। यहां आज तक आंगनवाड़ी केंद्र का पक्का भवन नहीं बन पाया है। मजबूरी में मासूम बच्चों की कक्षाएं खेत और टिकरा पर बांस के खंभों तथा हरे जालीनुमा नेट से बने अस्थायी झोपड़ीनुमा शेड के नीचे संचालित की जा रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से गांव में आंगनवाड़ी भवन निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक न तो भवन स्वीकृत हुआ और न ही निर्माण कार्य शुरू हो सका। ऐसे में बच्चों को खुले वातावरण में जमीन पर दरी बिछाकर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। तेज धूप, बारिश और ठंड के मौसम में भी यही व्यवस्था बनी रहती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
आंगनवाड़ी केंद्र में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ पोषण आहार, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों का लाभ दिया जाता है। लेकिन सरगीगुड़ा में भवन के अभाव के कारण इन सेवाओं का संचालन भी प्रभावित हो रहा है। बरसात के दौरान पानी भरने और तेज हवाओं के कारण कई बार गतिविधियां बाधित हो जाती हैं। गर्मियों में भीषण गर्मी और सर्दियों में खुले वातावरण के कारण छोटे बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि खुले क्षेत्र में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा हमेशा बना रहता है। बच्चों के साथ किसी भी समय अप्रिय घटना हो सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार महिला एवं बाल विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से भवन निर्माण की मांग से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी सीमित संसाधनों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के बावजूद वे बच्चों को पढ़ाने, पोषण आहार वितरण करने तथा गर्भवती और धात्री महिलाओं से संबंधित योजनाओं का संचालन करने का प्रयास कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि पक्का भवन बन जाए तो बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और सभी योजनाओं का बेहतर ढंग से संचालन किया जा सकेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा और पोषण को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन जब गांव के छोटे-छोटे बच्चों के लिए एक सुरक्षित आंगनवाड़ी भवन तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो यह चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि जल्द भवन निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले समय में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
सरगीगुड़ा की यह तस्वीर केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर भी इशारा करती है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर शीघ्र संज्ञान लेकर बच्चों के लिए सुरक्षित एवं सुविधायुक्त आंगनवाड़ी भवन उपलब्ध कराएंगे, या फिर मासूम बच्चे इसी तरह अस्थायी झोपड़ी के नीचे अपना भविष्य संवारने को मजबूर रहेंगे।




