गया जगन्नाथ पिंडदान से पूर्व श्रीमद्भागवत कथा एवं पितृ पूजन का विशेष महत्व : कुलगुरु श्री शेषधर मिश्र अनुरागी जी महाराज*
गया जगन्नाथ पिंडदान से पूर्व श्रीमद्भागवत कथा एवं पितृ पूजन का विशेष महत्व : कुलगुरु श्री शेषधर मिश्र अनुरागी जी महाराज*

*गया जगन्नाथ पिंडदान से पूर्व श्रीमद्भागवत कथा एवं पितृ पूजन का विशेष महत्व : कुलगुरु श्री शेषधर मिश्र अनुरागी जी महाराज*
रिपोर्ट:* गुलाब जायसवाल ✍️📰
राजापुर, प्रतापगढ़। गया-जगन्नाथ धाम में पिंडदान एवं पितृ तर्पण के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा से पूर्व श्रीमद्भागवत कथा का पारायण एवं पितरों का विधिवत पूजन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह बात राजापुर, प्रतापगढ़ में श्री राधेश्याम द्विवेदी जी के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पारायण के दौरान कुलगुरु श्री शेषधर मिश्र अनुरागी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पितरों का स्मरण, तर्पण, पूजन एवं दान श्रद्धा और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति माने गए हैं। गया-जगन्नाथ की पवित्र भूमि पर पिंडदान से पूर्व भागवत कथा का पारायण और पितृ पूजन करने से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए धार्मिक यात्रा का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि पितृदोष से मुक्ति के लिए श्रद्धालुओं को अपनी आस्था एवं परंपरा के अनुसार योग्य आचार्यों के मार्गदर्शन में शास्त्रीय विधि-विधान से पितृ कर्म संपन्न करना चाहिए।
उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथा मनुष्य को भक्ति, सदाचार, धर्म और संस्कारों से जोड़ती है। भगवान के प्रति श्रद्धा के साथ पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव जीवन में धार्मिक चेतना को और मजबूत करता है।
इस पावन अवसर पर पं. कमल कृष्ण अनुरागी जी महाराज, श्री अशोक तिवारी, उपेंद्र मणि पाण्डेय, आलोक पाण्डेय एवं बलराम मिश्र जी सहित अन्य आचार्यगण वैदिक रीति-विधान से पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। श्रद्धालु भी पूरे भक्तिभाव के साथ इन धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बन रहे हैं।
कथा स्थल पर बड़ी पारिवारिक में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक बना हुआ है। कथा श्रवण के साथ पितृ पूजन एवं वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान अर्पित कर रहे हैं।




