आजादी के 80 साल बाद भी कीचड़ में सड़क, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का रोजाना संघर्ष
आजादी के 80 साल बाद भी कीचड़ में सड़क, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का रोजाना संघर्ष

आजादी के 80 साल बाद भी कीचड़ में सड़क, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का रोजाना संघर्ष
गरियाबंद। देश आजादी के 80 साल पूरे होने के बाद विकास की नई ऊंचाइयों को छूने का दावा कर रहा है। गांवों तक सड़क, शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की बात की जा रही है, लेकिन गरियाबंद जिले के मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक जाने वाले मार्ग की तस्वीर विकास के इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
बारिश होते ही यह रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, पानी और फिसलन के कारण ग्रामीणों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी इस मार्ग से रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है।
कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते समय स्कूली बच्चों की साइकिल के पहिए धंस जाते हैं। कई बच्चों को अपनी साइकिल धक्का देकर निकालनी पड़ती है। फिसलन इतनी ज्यादा है कि कभी भी दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल बारिश के मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि खराब सड़क के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। जरूरी कामों से बाजार जाने, इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने और अन्य स्थानों तक जाने में भी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्कूली छात्राओं ने बताया कि बारिश के दिनों में सड़क पर जमा कीचड़ के कारण साइकिल चलाना मुश्किल हो जाता है। कई बार फिसलकर गिरने से कपड़े और किताब-कॉपियां तक खराब हो जाती हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
विद्यालय प्रबंधन भी सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर चिंतित है। प्रधानाचार्य देबानंद मांडवी का कहना है कि खराब सड़क के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। विशेषकर बारिश के दिनों में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से राहत मिल सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मूलभूत सुविधा के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? क्या मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक पक्की सड़क का निर्माण होगा, या फिर ग्रामीण और स्कूली बच्चे हर बारिश में इसी तरह कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर रहेंगे?




