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आय-जाति प्रमाण पत्र के लिए सालभर से भटक रहे धारनी धोड़ा के ग्रामीण; स्कूल छूटने से बच्चे मवेशी चराने को मजबूर, NH-130C चक्काजाम की चेतावनी 

आय-जाति प्रमाण पत्र के लिए सालभर से भटक रहे धारनी धोड़ा के ग्रामीण; स्कूल छूटने से बच्चे मवेशी चराने को मजबूर, NH-130C चक्काजाम की चेतावनी 

प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

आय-जाति प्रमाण पत्र के लिए सालभर से भटक रहे धारनी धोड़ा के ग्रामीण; स्कूल छूटने से बच्चे मवेशी चराने को मजबूर, NH-130C चक्काजाम की चेतावनी

हेमचंद नागेश कि रिपोर्ट

गरियाबंद. गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत अमलीपदर तहसील कार्यालय इन दिनों अपनी चरम प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता को लेकर सुर्खियों में है। एक तरफ जहां सूबे की सरकार जीरो टॉलरेंस और ‘सुशासन’ का दम भर रही है, वहीं दूसरी तरफ अमलीपदर तहसील के एक कंप्यूटर ऑपरेटर की कथित मनमानी के कारण लगभग 80 स्कूली बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है। ग्राम पंचायत धारनी धोड़ा के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अमलीपदर तहसील में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर प्रकाश कुमार पटेल द्वारा पिछले एक साल से स्कूली बच्चों का आय और जाति प्रमाण पत्र बनाकर नहीं दिया जा रहा है।

 

कलम की जगह हाथों में आई लाठी: दाखिले से महरूम हुए मासूम

 

ग्रामीणों का सबसे दर्दनाक आरोप यह है कि समय पर आय और जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण धारनी धोड़ा गांव के कई गरीब बच्चों का स्कूलों में आगामी कक्षाओं में एडमिशन ही नहीं हो पाया। जिस उम्र में इन बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और कलम होनी चाहिए थी, प्रशासनिक लेट-लतीफी के कारण वे आज जंगलों और खेतों में गाय-बैल (मवेशी) चराने को मजबूर हैं। यह सीधे तौर पर शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून और बच्चों के मौलिक अधिकारों का खुला मखौल है।

 

अधिकारियों की कथनी-करनी में अंतर: सुशासन शिविर का आश्वासन निकला खोखला

 

पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि ऐसा नहीं है कि इस बात की खबर बड़े अधिकारियों को नहीं है। एक साल पहले जब झरगाँव में ‘सुशासन शिविर’ का आयोजन हुआ था, तब ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और तहसीलदार के सामने सीधे तौर पर ऑपरेटर की इस लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई थी और लिखित आवेदन भी सौंपा था। उस दौरान तहसीलदार ने बड़े-बड़े दावे करते हुए कहा था कि “मामले का जल्द ही निराकरण कर दिया जाएगा।” लेकिन इस बात को आज पूरा एक साल बीत चुका है। ग्रामीण पिछले 12 महीनों से लगातार अपनी जेब से किराया फूंककर अमलीपदर तहसील कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, पर उन्हें सिर्फ अगली तारीख और आश्वासन ही मिल रहा है।

 

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: नेशनल हाईवे 130C पर होगा ‘चक्काजाम’

 

तहसील कार्यालय की इस तानाशाही और बच्चों के बर्बाद होते भविष्य को देख अब धारनी धोड़ा के ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया है। ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस गंभीर समस्या का तुरंत और समयबद्ध निराकरण कर बच्चों के प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए, तो वे उग्र आंदोलन का रुख अख्तियार करेंगे। ग्रामीणों ने दोटूक लफ्जों में कहा है कि वे बहुत जल्द नेशनल हाईवे 130C पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और अमलीपदर तहसील प्रबंधन की होगी।

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