CCTV फुटेज ने खोली लूट-छिनैती केस की परतें, पुलिस कार्रवाई पर सवाल*
CCTV फुटेज ने खोली लूट-छिनैती केस की परतें, पुलिस कार्रवाई पर सवाल*

*प्रतापगढ़: CCTV फुटेज ने खोली लूट-छिनैती केस की परतें, पुलिस कार्रवाई पर सवाल*
प्रशांत दुबे कि रिपोर्ट
*अंतू थाना क्षेत्र का मामला – व्यक्तिगत रंजिश से झूठा मुकदमा दर्ज होने की आशंका*
प्रतापगढ़ के अंतू थाना क्षेत्र में दर्ज लूट, छिनैती और रंगदारी के एक मामले ने नया मोड़ ले लिया है। शिकायतकर्ता द्वारा गंभीर धाराओं में दर्ज कराए गए मुकदमे और पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आए CCTV फुटेज ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला दिया है।
*क्या है पूरा मामला*
एक व्यक्ति ने अपने विरोधी के खिलाफ लूट और धमकी का केस दर्ज कराया। पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश देनी शुरू कर दी। आरोपी घर पर न मिलने पर पुलिस ने परिजनों, खासकर महिलाओं को थाने लाने और आरोपी को शरण देने के आरोप में एक अधिवक्ता को रातभर थाने में बैठाए रखने का आरोप लगा है।
*CCTV फुटेज ने बदली कहानी*
सूत्रों के अनुसार घटना के समय और आसपास के घंटों में आरोपी शहर के अलग-अलग हिस्सों में CCTV कैमरों में दिखाई दे रहा है। अगर यह सच है तो आरोपी घटना स्थल से दूर था। सवाल ये है कि जब आरोपी मौके पर था ही नहीं तो इतनी गंभीर धाराओं में मुकदमा कैसे दर्ज हुआ? पुलिस ने प्राथमिक जांच क्यों नहीं की?
*स्थानीय रंजिश की बात*
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। आशंका है कि व्यक्तिगत दुश्मनी में झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोपी को हाल ही में हाईकोर्ट से जमानत मिली है और वह महीनों बाद जेल से बाहर आया है। इससे पुलिस की भूमिका पर और सवाल उठ रहे हैं।
*तीन बड़े सवाल*
– बिना प्रारंभिक जांच के गंभीर धाराएं क्यों लगाई गईं?
– CCTV फुटेज को नजरअंदाज क्यों किया गया?
– परिजनों और अधिवक्ता के साथ की गई कार्रवाई क्या उचित थी?
यह मामला सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर नहीं, बल्कि न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच सामने आए और किसी निर्दोष को सजा न मिले।




