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उड़ीसा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं ने मनाया सुदरशा व्रत जानिए कैसे होता है ये व्रत 

उड़ीसा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं ने मनाया सुदरशा व्रत जानिए कैसे होता है ये व्रत 

प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

उड़ीसा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं ने मनाया सुदरशा व्रत जानिए कैसे होता है ये व्रत

गरियाबंद /उड़ीसा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र छत्तीसगढ़ में भी महिलाओं ने मनाया सुदरशा व्रत अक्सर यह व्रत ओडिशा राज्य में मनाया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्र जो उड़ीसा के सीमावर्ती है जैसे गरियाबंद जिले के देवभोग और अमलीपदर क्षेत्र में खास तौर पर यह व्रत मनाया गया। आपको बता दे की यह महालक्ष्मी जी का एक उपासना होता है। यह व्रत किसी भी शुक्ल पक्ष गुरुवार के दिन अगर दशमी तिथि पड़ता है तो यह व्रत को माना जाता है।

इस व्रत में महिलाएं एकत्रित होकर पूजा सामग्री के साथ एक सफेद धागा जिसमें 10 गांठ होता है । माना जाता है जिसमें 10 देवशक्तियां का वास होता है। एवं कथा सुनाया जाता है जो राजा चोल की कथा का वर्णन किया जाता है। इस व्रत को नियम पुर्व धारण करने से स्त्री सौभाग्यशाली, ऐश्वर्य, संतान एवं श्री महालक्ष्मी का वरद हस्त प्राप्त होता है । इसमें महिला एकत्रित होकर व्रत कथा का श्रवण करते हैं एवं नया व्रत (सफेद धागा जिसमें 10 गांठ होता है)धारण करते हैं। एवं आवल बेलपत्र पीला चावल दूध दही पंचामृत कर मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हुए नए धागा अर्थव्रत को भी पूजा अर्चना करके धारण करते हैं इसे महिलाएं अपने भुजा पर धारण करती हैं।

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