कुंडा के युवक की हुई धूमनगंज में हत्या* *मदद पर तंज कसना पड़ा भारी, दोस्त ने ही कर डाली साथी की हत्या*
कुंडा के युवक की हुई धूमनगंज में हत्या* *मदद पर तंज कसना पड़ा भारी, दोस्त ने ही कर डाली साथी की हत्या*

*कुंडा के युवक की हुई धूमनगंज में हत्या*
*मदद पर तंज कसना पड़ा भारी, दोस्त ने ही कर डाली साथी की हत्या*
गुलाब जयसवाल कि रिपोर्ट
*आलोक की आमदनी और लाइफ स्टाइल से जलता था शुभम, बेरोजगार होने का ताना बना दुश्मनी की वजह—दो साथियों संग रची खूनी साजिश*
कुंडा/प्रतापगढ़। दोस्ती के रिश्ते में घुली जलन जब सिर चढ़ी तो दोस्त ही दोस्त का हत्यारा बन बैठा। धूमनगंज में हुई आलोक गुप्ता हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक हत्या की जड़ में दोस्ती, रुपये का लेनदेन, साथी की बेहतर आमदनी और उसके रहन-सहन से पैदा हुई ईर्ष्या थी। जिस आलोक से आरोपी दोस्ती रखता था और जरूरत के वक्त रुपये भी लेता था, उसी की कमाई और लाइफ स्टाइल उसे खटकने लगी। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आलोक द्वारा शुभम को बेरोजगार कहकर तंज किया जाता था। यही बात शुभम के भीतर पल रही कुंठा को लगातार भड़काती रही और आखिरकार उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर आलोक की हत्या की साजिश रच डाली।
कुंडा कोतवाली क्षेत्र के पांडेय का पुरवा गांव निवासी आलोक गुप्ता धूमनगंज थाना क्षेत्र के हरवारा स्थित अम्बर अपार्टमेंट में कमरा किराये पर लेकर रहता था। वह शादी-विवाह समारोहों में फोटोग्राफी का काम करता था और पुलिस के अनुसार इससे उसे अच्छी आमदनी होती थी। वहीं आरोपी शुभम तिवारी की उससे दोस्ती थी और उसने आलोक से काफी रुपये उधार भी ले रखे थे। पुलिस के मुताबिक शुभम आलोक की अच्छी आमदनी के साथ ही उसके रहन-सहन से भी ईर्ष्या रखता था। आलोक का उसे बेरोजगार कहकर मजाक उड़ाना शुभम को नागवार गुजरता था। मदद और तंज का यही रिश्ता धीरे-धीरे ऐसी दुश्मनी में बदला, जिसमें दोस्ती का अंत हत्या से हुआ।
आलोक के लापता होने पर उसके भाई अनुराग गुप्ता ने धूमनगंज थाने में 22 अगस्त को गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस मामले की जांच कर ही रही थी कि सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के रीवा जनपद के सोहागी थाना क्षेत्र में सेल्की प्वाइंट के पास नीले रंग के बैग में अज्ञात शव मिलने की खबर सामने आई। शव की पहचान कराने के लिए आलोक के भाई अनुराग गुप्ता को सोहागी ले जाया गया, जहां उसने शव की पहचान अपने भाई आलोक गुप्ता के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच तेज कर दी।
पुलिस के अनुसार धूमनगंज थाने की टीम ने अम्बर अपार्टमेंट, हरवारा में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में 11 अगस्त को अपार्टमेंट से एक नीले रंग के भारी बैग में तीन लोगों को कार पर बैठकर जाते देखा गया। पुलिस ने फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान शुरू की। पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के बाद शुभम तिवारी, शुभम यादव और अंकुश यादव के नाम सामने आए और पुलिस ने आलोक की उलझी हुई हत्या और उसके गायब होने के मामलें को एकदम खोलकर रख दिया।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में मुख्य आरोपी शुभम तिवारी ने बताया कि आलोक उसका मित्र था और शादी समारोहों में फोटोग्राफी कर अच्छी कमाई करता था। शुभम उससे रुपये भी उधार ले चुका था, लेकिन आलोक की आर्थिक स्थिति और रहन-सहन को लेकर उसके मन में ईर्ष्या बढ़ती गई। पुलिस के मुताबिक आलोक के तानों से भी वह भीतर ही भीतर खिन्न था। इसी खुन्नस में शुभम ने अपने साथियों शुभम यादव और अंकुश यादव के साथ मिलकर आलोक की हत्या की योजना बनाई।
साजिश के तहत आलोक को गोली मारी गई। गोली लगने के बाद जब वह छटपटाने लगा तो आरोपियों ने उसका मुंह और गला दबा दिया। इसके बाद शव को चार पहिया वाहन में रखकर मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सोहागी क्षेत्र ले जाया गया और वहां ठिकाने लगा दिया गया। बड़ी सफाई से की गई हत्या और शव को छुपाने के बाद भी पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ते हुए हत्या का खुलासा करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने एक अवैध .32 बोर पिस्टल, एक अवैध .32 बोर खोखा कारतूस, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन, एक ब्लूटूथ तथा वारदात में प्रयुक्त चार पहिया वाहन बरामद किया है। मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी बढ़ाकर आरोपियों को पुलिस ने न्यायालय के में हाजिर कर दिया।
*दोस्ती में घुली जलन ने बना दिया हत्यारा*
इस हत्याकांड की सबसे कड़वी तस्वीर यही है कि जिसे दोस्त समझा गया, वही जान का दुश्मन निकला। साथी की अच्छी कमाई और बेहतर जिंदगी देखकर पैदा हुई जलन, रुपये के लेनदेन और बेरोजगारी के तानों ने दोस्ती को भीतर ही भीतर दुश्मनी में बदल दिया। तंज को सहनकर उस तंज को अपनी ताकत बनाकर अपनी जिंदगी सुधारने के बजाय आरोपी ने उसका जवाब खून से दिया और एक परिवार से उसका अपना छीन लिया। मदद का रिश्ता कब जलन में बदला और जलन कब हत्या की वजह बन गई?—धूमनगंज का यह हत्याकांड दोस्ती के चेहरे के पीछे छिपी इसी खतरनाक कुंठा की कहानी बयां कर रहा है।




