बिहार में शिक्षक के रूप में सेवा दे रही कुंडा की बेटी का दिल्ली में संस्कृत अध्यापिका पद पर चयन*
बिहार में शिक्षक के रूप में सेवा दे रही कुंडा की बेटी का दिल्ली में संस्कृत अध्यापिका पद पर चयन*

*बिहार में शिक्षक के रूप में सेवा दे रही कुंडा की बेटी का दिल्ली में संस्कृत अध्यापिका पद पर चयन*
रिपोर्ट:* गुलाब जायसवाल ✍️📰
*DSSSB से चयन, जगापुर हीरागंज में खुशी का माहौल,परिवार और ग्रामीणों ने दी बधाई और कहाँ बेटी पढाओ बेटी बचाओ 🙏*
कुंडा/प्रतापगढ़। कुंडा तहसील क्षेत्र के जगापुर हीरागंज निवासी अरुण कुमार मिश्रा की छोटी बेटी संध्या मिश्रा का दिल्ली में संस्कृत अध्यापिका (TGT) पद पर चयन हुआ है। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) के माध्यम से हुए चयन की जानकारी मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों ने संध्या को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
संध्या मिश्रा वर्तमान में बिहार में संस्कृत विषय की अध्यापिका के रूप में सेवाएं दे रही थीं। शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाने के साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। अपनी मेहनत और लगन के बल पर अब उन्होंने दिल्ली में संस्कृत अध्यापिका के पद पर चयन हासिल किया है।
संध्या के दिल्ली चयन की खबर से उनके पैतृक गांव जगापुर हीरागंज में परिजनों और ग्रामीणों में हर्ष है। वहीं कुंडा स्थित उनके निवास पर भी परिचितों और मोहल्लेवासियों ने प्रसन्नता जताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
संध्या मिश्रा के पिता अरुण कुमार मिश्रा हीरागंज में चश्मे का व्यवसाय करते हैं। परिवार की मेहनत और संस्कारों के बीच पली-बढ़ी संध्या ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कृपालु बालिका इंटर कॉलेज से हुई है। उनकी सफलता से विद्यालय परिवार में भी खुशी का माहौल है।
संध्या के भाई एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ, कुंडा के तहसील अध्यक्ष गौरव मिश्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से बहन के चयन की जानकारी साझा करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण है। बहन की मेहनत और लगन ने परिवार का मान बढ़ाया है।
संध्या मिश्रा की इस उपलब्धि पर परिजनों, शिक्षकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लोगों ने उम्मीद जताई कि वह शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाओं से विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
“मेहनत, लगन और निरंतर तैयारी से मिली सफलता ने परिवार के साथ पैतृक गांव का भी मान बढ़ाया।”




