क्या प्रतापगढ़ में सिर्फ राजा सक्षम सिंह योगी ही बचे हैं असली गौ सेवक
क्या प्रतापगढ़ में सिर्फ राजा सक्षम सिंह योगी ही बचे हैं असली गौ सेवक

क्या प्रतापगढ़ में सिर्फ राजा सक्षम सिंह योगी ही बचे हैं असली गौ सेवक
प्रतापगढ़ जिले में गौ माता की बदहाली को लेकर एक बेहद बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि आखिर जिले में गौ सेवा के नाम पर बने दर्जनों संगठन और उनके पदाधिकारी उस समय कहाँ चले जाते हैं, जब गौ माता को वास्तव में उनकी जरूरत होती है?
रत्तूपुर की गौशाला का मामला हो या फिर सराय भीमसेन गौशाला की दर्दनाक तस्वीरें—हर जगह गौ माता की बदहाली सामने आती रही है। लेकिन आरोप है कि गौ सेवा का दावा करने वाले अधिकांश संगठन और उनके बड़े-बड़े पदाधिकारी इन मामलों में चुप्पी साधे रहे।
बताया जा रहा है कि बीते 16 अगस्त को सराय भीमसेन गौशाला की एक बेहद दुखद तस्वीर सामने आई थी। एक पत्रकार द्वारा बनाए गए वीडियो में गौशाला से महज लगभग 40 से 50 मीटर की दूरी पर एक मृत गाय खुले में पड़ी दिखाई दी। आरोप है कि उसके शव को कुत्ते नोच रहे थे।
इतना ही नहीं, गौशाला में मौजूद अन्य गौवंश की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। वीडियो सामने आया, लोगों ने देखा, सोशल मीडिया पर चर्चा हुई, लेकिन सवाल यह है कि इसके बाद जिले के कितने गौ सेवा संगठन मौके पर पहुंचे?
कितने संगठन प्रशासन के सामने खड़े हुए?
कितने पदाधिकारियों ने जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा?
और कितनों ने गौ माता की इस स्थिति को लेकर आंदोलन किया?
यही सवाल अब प्रतापगढ़ की जनता पूछ रही है।
क्योंकि सराय भीमसेन की घटना के बाद अब रत्तूपुर स्थित गौशाला को लेकर भी गंभीर आरोप और चिंताजनक तस्वीरें सामने आ रही हैं। गौ माता के तड़पने और बदहाल स्थिति में पड़े होने की बातें सामने आने के बाद एक बार फिर गौ सेवा संगठनों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजों के अनुसार, जब भी गौ माता की बदहाली का मामला सामने आता है, राजा सक्षम सिंह योगी खुलकर आवाज उठाते दिखाई दिए उनके साथ मिलकर आवाज उठाने का समय आ गया है
चाहे सड़क पर उतरकर विरोध करना हो…
चाहे नगर पंचायत अध्यक्ष को अल्टीमेटम देना हो…
या फिर प्रशासन से जवाब मांगना हो…
हर बार सक्षम योगी की सक्रियता चर्चा का विषय बन जाती है।
अब सवाल उन सैकड़ों लोगों से है, जो अपने नाम के आगे गौ सेवक, अध्यक्ष, संयोजक, जिलाध्यक्ष और विभिन्न संगठनों के बड़े पदाधिकारी होने का दावा करते हैं।
आखिर वे लोग कहाँ हैं?
क्या गौ सेवा केवल सोशल मीडिया पोस्ट करने तक सीमित रह गई है?
क्या गौ माता की सेवा का मतलब सिर्फ किसी विशेष दिन गौशाला पहुंचकर हरा चारा डालना और फोटो खिंचवाना भर रह गया है?
क्या गौ सेवा के नाम पर संगठन बनाना आसान है, लेकिन जब वास्तव में गौ माता की रक्षक है तो उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने का समय आ गया है
सराय भीमसेन और रत्तूपुर की घटनाओं ने प्रतापगढ़ के तथाकथित गौ सेवा संगठनों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अगर किसी गौशाला में गौवंश भूखा है…
बीमार है…
तड़प रहा है…
या मृत गौवंश के शव का सम्मानजनक तरीके से निस्तारण तक नहीं हो रहा है…
तो आखिर गौ सेवा संगठन किस दिन और किस काम के लिए बनाए गए हैं?
यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति या संगठन पर सवाल नहीं है। यह पूरे सिस्टम पर सवाल है।
गौशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी किसकी है?
गौवंश के चारे-पानी और इलाज की व्यवस्था कौन देख रहा है?
बीमार गौवंश का उपचार समय पर क्यों नहीं हो रहा?
और सबसे बड़ा सवाल—जब ऐसी घटनाएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही आखिर तय क्यों नहीं होती?
जनता का कहना है कि गौ माता को सिर्फ नारों की जरूरत नहीं है। गौ माता को वास्तविक सेवा चाहिए।
उन्हें फोटो खिंचवाने वाले लोग नहीं, बल्कि उनके लिए संघर्ष करने वाले लोग चाहिए।
उन्हें सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े पोस्ट करने वाले नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उनकी पीड़ा समझने वाले लोग चाहिए।
आज प्रतापगढ़ में सवाल यही उठ रहा है कि क्या वास्तव में गौ सेवा के नाम पर काम करने वाले संगठन अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं?
या फिर गौ माता के नाम पर सिर्फ पद, प्रतिष्ठा और दिखावे की राजनीति चल रही है?
इन घटनाओं के बीच राजा सक्षम सिंह योगी की सक्रियता को लेकर समर्थकों का कहना है कि वे लगातार गौ माता के मुद्दों को उठाते रहे हैं और जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगते रहे हैं।
लेकिन जिले के अन्य गौ सेवा संगठनों और पदाधिकारियों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
गौशालाओं की वास्तविक स्थिति सामने आए।
बीमार और घायल गौवंश के इलाज की उचित व्यवस्था की जाए।
मृत गौवंश के सम्मानजनक निस्तारण की जिम्मेदारी तय हो।
और जो लोग गौ सेवा के नाम पर जिम्मेदारी लेते हैं, उनसे यह पूछा जाए कि संकट के समय वे आखिर कहाँ होते हैं?
क्योंकि—
गौ माता को फोटो नहीं चाहिए…
गौ माता को सिर्फ नारे नहीं चाहिए…
गौ माता को ऐसे बेटे चाहिए, जो उनकी पीड़ा देखकर चुप न रहें और जरूरत पड़ने पर उनके लिए लड़ सकें।
अब देखना होगा कि प्रतापगढ़ के प्रशासन और गौ सेवा संगठनों की ओर से इन गंभीर सवालों का क्या जवाब आता है।
आप इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं? क्या गौ सेवा केवल दिखावा बनकर रह गई है या फिर वास्तविक गौ सेवकों को आगे आने की जरूरत है? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताइए।



