झरगांव तेतलपारा में धूमधाम से मनाया गया भाई जिह्ता पर्व, बालिकाओं ने किया ज्वारा विसर्जन
झरगांव तेतलपारा में धूमधाम से मनाया गया भाई जिह्ता पर्व, बालिकाओं ने किया ज्वारा विसर्जन

झरगांव तेतलपारा में धूमधाम से मनाया गया भाई जिह्ता पर्व, बालिकाओं ने किया ज्वारा विसर्जन
नौ दिनों तक विधि-विधान से की गई ज्वारा की पूजा-अर्चना, भाइयों की लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के साथ संपन्न हुआ पर्व
संवाददाता हेमचंद नागेश, गरियाबंद।
गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम झरगांव तेतलपारा में पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्था के साथ बालिकाओं ने बड़े ही धूमधाम से भाई जिह्ता पर्व मनाया। इस अवसर पर नौ दिनों तक ज्वारा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धा और उत्साह के साथ ज्वारा विसर्जन किया गया। पर्व के दौरान गांव में धार्मिक वातावरण बना रहा और बालिकाओं ने पूरे उत्साह के साथ परंपरा का निर्वहन किया।
उड़ीसा राज्य की सीमा से लगे क्षेत्र में इस पर्व को स्थानीय परंपरा के अनुसार ‘भाई जिह्ता’ के नाम से जाना जाता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर बालिकाएं अपने भाइयों की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वर्षों से चली आ रही इस पारंपरिक धार्मिक मान्यता को आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाया जा रहा है।
नौ दिनों तक की गई ज्वारा की पूजा-अर्चना
भाई जिह्ता पर्व के अंतर्गत बालिकाओं ने लगातार नौ दिनों तक ज्वारा की पूजा-अर्चना की। इस दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक पूजा की गई। नौ दिनों की पूजा के बाद विसर्जन की तैयारी की गई। पर्व को लेकर बालिकाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। ज्वारा विसर्जन के साथ ही नौ दिनों से चल रही पूजा-अर्चना का समापन हुआ।
उपवास रखकर निभाई जाती है परंपरा
इस पर्व की विशेषता यह है कि ज्वारा विसर्जन के दिन बालिकाएं सुबह से ही उपवास रखती हैं। दिनभर धार्मिक नियमों का पालन करने के बाद शाम के समय तालाब से कलश में पानी लाया जाता है। इसके पश्चात निर्धारित परंपरा के अनुसार रात लगभग तीन बजे बालिकाएं ज्वारा विसर्जन के लिए तालाब की ओर जाती हैं।
रात के शांत वातावरण में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ज्वारा का विसर्जन किया जाता है। इस दौरान बालिकाएं अपने भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। उपवास से लेकर विसर्जन तक की पूरी प्रक्रिया में उनकी श्रद्धा, आस्था और पारिवारिक रिश्तों के प्रति समर्पण दिखाई देता है।
भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है भाई जिह्ता
भाई जिह्ता पर्व केवल पूजा-अर्चना और ज्वारा विसर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और पारंपरिक संस्कृति को जीवित रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पर्व के माध्यम से बालिकाएं अपने भाइयों के प्रति प्रेम और मंगलकामना व्यक्त करती हैं। उड़ीसा सीमावर्ती क्षेत्र में प्रचलित यह परंपरा स्थानीय संस्कृति और लोक आस्था की एक विशेष पहचान है।
आज के आधुनिक दौर में भी झरगांव तेतलपारा की बालिकाओं द्वारा इस परंपरा को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाना क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता है। नौ दिनों की पूजा के बाद संपन्न हुए ज्वारा विसर्जन के साथ बालिकाओं ने अपने भाइयों की लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की तथा सुखी और समृद्ध जीवन की प्रार्थना की।
इस तरह झरगांव तेतलपारा में भाई जिह्ता पर्व पारंपरिक आस्था, धार्मिक विश्वास और भाई-बहन के प्रेम के संदेश के साथ संपन्न हुआ।




