मान्धाता पावर हाउस बवाल: पहले बिजली नहीं, अब जनता पर FIR – एक्सईएन की कार्यशैली पर उठे सवाल*
मान्धाता पावर हाउस बवाल: पहले बिजली नहीं, अब जनता पर FIR - एक्सईएन की कार्यशैली पर उठे सवाल*

*मान्धाता पावर हाउस बवाल: पहले बिजली नहीं, अब जनता पर FIR – एक्सईएन की कार्यशैली पर उठे सवाल*
प्रशांत दुबे कि रिपोर्ट
*प्रतापगढ़।* जनपद के विद्युत विभाग खंड कुण्डा की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर पंचायत मान्धाता बाजार के उपभोक्ता पिछले दो वर्षों से अघोषित बिजली कटौती से परेशान हैं, लेकिन विभाग सुनने को तैयार नहीं।

नगर पंचायत बन जाने के बाद भी मान्धाता को रोस्टर के अनुसार 22 घंटे बिजली नहीं मिल रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार शाम होते ही आंख-मिचौली शुरू हो जाती थी और रातभर किस्तों में बिजली दी जा रही थी। विभाग सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप में सप्लाई बहाल होने का मैसेज डालकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता था।
विरोध के बाद कैसे सुधरी सप्लाई?
12 सितंबर को उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। जेठवारा पुलिस की मौजूदगी में सैकड़ों लोगों ने सरायभीमसेन स्थित 132 केवी उपकेन्द्र के बाहर पीपल के पेड़ के पास शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष बादल पटेल और विधायक विश्वनाथगंज द्वारा पहले भी कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
आश्चर्य की बात है कि जिस बिजली व्यवस्था को दो साल से ठीक नहीं किया गया, वह विरोध प्रदर्शन के बाद शनिवार शाम से ही 22 घंटे सुचारू रूप से मिलने लगी। जनता पूछ रही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक दिन में ही व्यवस्था सुधर गई? क्या विभाग अपनी कोई खामी छुपा रहा था?
शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर गैर-जमानती धारा में केस
वहीं दूसरी ओर अवर अभियंता राजेश कुमार की तहरीर पर जेठवारा थाने में FIR No. 0280/26 दर्ज कर दी गई। इसमें नगर पंचायत अध्यक्ष समेत अपना दल और भाजपा कार्यकर्ताओं – पप्पू सरोज, मोनू सिंह, अमित तिवारी उर्फ दीपू, प्रभात तिवारी, दिलीप तिवारी, बैद्यनाथ सरोज, संजय सिंह और 100 अज्ञात लोगों पर BNS की धारा 132 समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
सवाल यह है कि जब लोग शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे और मौके पर पहले से पुलिस मौजूद थी, तो गैर-जमानती धारा लगाने की नौबत क्यों आई? क्या यह सत्तापक्ष के कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने की कोशिश है?
ट्रांसफार्मर जलने पर महीनों तक न बदलना, झटपट कनेक्शन के बाद भी कनेक्शन न देना और गांवों में अधूरे केबल तार लगाने जैसे सवालों के बीच अब जनता पर ही मुकदमा दर्ज होना विद्युत विभाग की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। *देवभोग न्यूज़ एक्सप्रेस* प्रशांत दुबे (प्रभात)




