
सुशासन तिहार से सरपंच संघ ने बनाई दूरी, मांगों को लेकर जनपद परिसर में धरना
हेमचंद नागेश कि रिपोर्ट
देवभोग न्यूज़:
एक ओर ब्लॉक मुख्यालय मांडागांव में शासन द्वारा “सुशासन तिहार” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के सरपंचों ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जनपद पंचायत परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगभग 53 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
धरना प्रदर्शन के दौरान सरपंच संघ ने ज्ञापन सौंपते हुए पंचायतों में लंबित विकास कार्यों को शीघ्र स्वीकृति देने, आवश्यक निर्माण सामग्री एवं राशि उपलब्ध कराने, पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की उचित सुनवाई सुनिश्चित करने सहित कई मांगें प्रशासन के सामने रखीं। सरपंचों का कहना है कि लंबे समय से मांगों और शिकायतों को लेकर अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पहुंचे सरपंचों में पवन यादव, तूलेश्वरी माझी, परमानंद नागेश, विश्वजीत ठाकुर, ठुकेलश धुर्वा, छायासन सोनवानी सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों से मनरेगा के तहत एक भी पुल-पुलिया या बड़ा निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है। पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरपंचों ने आरोप लगाया कि पंचायतों के प्रस्ताव और विकास कार्यों की फाइलें लगातार लंबित पड़ी हैं। कई बार अधिकारियों से चर्चा करने के बावजूद कार्य स्वीकृति को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। ऐसे में मजबूर होकर उन्हें सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रम से दूरी बनाकर धरना प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
सरपंच संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि गांवों के विकास के लिए समय पर राशि उपलब्ध नहीं हो रही है, वहीं कई योजनाओं का भुगतान भी लंबे समय से अटका हुआ है। पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने से विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान बताना है, लेकिन जमीनी स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
धरना प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने साफ चेतावनी दी कि यदि आने वाले सप्ताह में पंचायतों के निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी गई और मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।




