राजिम-छुरा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों को उखाड़ने पर उठे सवाल, अनुमति और आदेश की जांच की मांग
राजिम-छुरा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों को उखाड़ने पर उठे सवाल, अनुमति और आदेश की जांच की मांग

राजिम-छुरा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों को उखाड़ने पर उठे सवाल, अनुमति और आदेश की जांच की मांग

गरियाबंद। सड़क चौड़ीकरण को विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे आवागमन सुगम होता है और क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलती है। लेकिन विकास कार्यों की आड़ में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और निर्धारित नियमों की अनदेखी करने का अधिकार किसी को नहीं है।
राजिम-छुरा मार्ग पर पेड़ों को उखाड़ने की कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आखिर पेड़ों को हटाने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया? क्या इसके लिए संबंधित विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी? क्या सक्षम अधिकारी का आदेश जारी हुआ था और क्या निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया गया?
यदि सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को हटाना आवश्यक था, तो नियमानुसार अनुमति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए था। विकास कार्यों के साथ पर्यावरण का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले में स्थिति स्पष्ट करे और पेड़ों को उखाड़ने की कार्रवाई से जुड़े आदेश, अनुमति तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राजिम-छुरा मार्ग पर हुई कार्रवाई नियमानुसार की गई या निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी हुई।
अब बड़ा सवाल यही है कि विकास के नाम पर पेड़ों को उखाड़ने की अनुमति किसने दी और क्या इस पूरी कार्रवाई में नियमों का पालन किया गया?




