झाखरपारा सहकारी समिति में खाद की कमी से हड़कंप, 10.38 लाख के शॉर्टेज के बाद भी 5 लाख का अंतर बरकरार
झाखरपारा सहकारी समिति में खाद की कमी से हड़कंप, 10.38 लाख के शॉर्टेज के बाद भी 5 लाख का अंतर बरकरार

झाखरपारा सहकारी समिति में खाद की कमी से हड़कंप, 10.38 लाख के शॉर्टेज के बाद भी 5 लाख का अंतर बरकरार

धान खरीदी में गड़बड़ी के आरोपों के बाद अब खाद वितरण पर उठे सवाल, वार्षिक आमसभा में हंगामा; किसानों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
देवभोग। झाखरपारा सहकारी समिति एक बार फिर कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। पिछले धान खरीदी सीजन में उपजे शॉर्टेज के विवाद के बाद अब समिति में खाद वितरण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, खाद वितरण प्रक्रिया समाप्त होने के बाद स्टॉक सत्यापन के दौरान 10.38 लाख रुपये मूल्य की खाद की कमी सामने आई थी। इसके बाद संबंधित खाद-बीज वितरण प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई। हालांकि, अंतिम समायोजन रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी करीब 5 लाख रुपये की खाद का अंतर बरकरार रहने की बात सामने आई है।

इस पूरे मामले ने सहकारी समिति के कामकाज, खाद वितरण के रिकॉर्ड और स्टॉक प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि जांच में वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
स्टॉक सत्यापन में सामने आई 10.38 लाख रुपये की खाद की कमी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2 सितंबर को सहकारिता सुपरवाइजर झाखरपारा खाद गोदाम में स्टॉक सत्यापन के लिए पहुंचे थे। सत्यापन के दौरान लगभग 10.38 लाख रुपये मूल्य की खाद का शॉर्टेज सामने आया। बताया गया कि आवंटित खाद की संबंधित मात्रा न तो वितरण रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी और न ही गोदाम में उपलब्ध थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति प्रबंधक नयन सिंह ठाकुर ने खाद-बीज वितरण प्रभारी अभय नागेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही, पूरे मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया।
जानकारी के मुताबिक, प्रक्रिया पूरी कर अंतिम समायोजन रिपोर्ट 30 सितंबर तक सौंपनी थी। निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद भी लगभग 5 लाख रुपये मूल्य की खाद का अंतर बने रहने की बात कही जा रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुरुआती सत्यापन में सामने आई कमी और अंतिम रिपोर्ट में दर्ज अंतर के बीच का हिसाब किस आधार पर तय किया गया। इसका स्पष्ट जवाब संबंधित रिकॉर्ड के मिलान और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
जांच प्रक्रिया को लेकर भी उठ रहे सवाल
2 सितंबर से 30 सितंबर के बीच खाद गोदाम के संचालन और स्टॉक सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि इस अवधि में गोदाम पर कई बार ताला लगा रहा और संबंधित कर्मचारी उपलब्ध नहीं मिले।
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि जांच के लिए बुलाए जाने और गोदाम निरीक्षण की प्रक्रिया में संबंधित खाद वितरण प्रभारी की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि खाद के आवंटन, वितरण, शेष स्टॉक और समायोजन से जुड़े सभी दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया जाए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाए कि स्टॉक में अंतर किन परिस्थितियों में उत्पन्न हुआ।
यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पिछले धान खरीदी सीजन में भी सामने आया था शॉर्टेज का मामला
झाखरपारा सहकारी समिति में खाद की कमी का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले धान खरीदी सीजन में भी समिति में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद हुआ था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती जांच में लगभग 2,400 क्विंटल धान की कमी सामने आने की बात कही गई थी। इसकी अनुमानित कीमत करीब 57 लाख रुपये बताई गई थी। आरोप था कि खरीदी रिकॉर्ड में जितनी मात्रा के धान की बोरियां दर्ज थीं, मौके पर उतनी मात्रा उपलब्ध नहीं मिली।
इस मामले में तत्कालीन खरीदी प्रभारी चंदन राजपुर पर लगभग 20 लाख रुपये मूल्य के धान की गड़बड़ी के आरोप सिद्ध होने की बात सामने आई थी। वहीं, मामले के अन्य पहलुओं और दूसरे संभावित जिम्मेदारों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुखचंद बेसरा द्वारा इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब खाद वितरण में कथित अनियमितता का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर समिति की कार्यप्रणाली और पूर्व में हुई जांचों की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पूर्व में विवादों में रहे कर्मचारी को प्रभारी प्रबंधक बनाए जाने पर विवाद
समिति से जुड़े विवादों में एक अन्य मुद्दा प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर भी सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, लगभग दो वर्ष पहले दीवानमुड़ा धान खरीदी केंद्र के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक नीलांबर बीसी का एक वीडियो कथित तौर पर किसानों से रिश्वत लेने के आरोपों के साथ वायरल हुआ था। इसके बाद सहकारिता विभाग द्वारा जांच किए जाने और आरोप सही पाए जाने की बात कही जा रही है। संबंधित मामले में उनके निलंबन और बाद में सेवा समाप्ति की कार्रवाई होने की जानकारी भी दी गई है।
अब आरोप लगाया जा रहा है कि बाद में उन्हें झाखरपारा केंद्र का प्रभारी प्रबंधक बनाया गया। बताया जाता है कि पिछले खरीदी सीजन में उन्होंने केंद्र की जिम्मेदारी संभाली थी और बाद में उनके प्रभार को लेकर लिखित आदेश भी जारी किया गया।
इस नियुक्ति को लेकर किसानों और समिति से जुड़े कुछ लोगों में नाराजगी की बात सामने आई है। उनका सवाल है कि पहले विवादों में रहे कर्मचारी को संवेदनशील सहकारी संस्था की जिम्मेदारी सौंपने से पहले किन मानकों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
हालांकि, नियुक्ति की परिस्थितियों, संबंधित आदेशों और कर्मचारी की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
वार्षिक आमसभा में हंगामा, दो घंटे के भीतर बैठक स्थगित
30 सितंबर को झाखरपारा सहकारी समिति के पदाधिकारियों और शेयरधारकों की वार्षिक आमसभा आयोजित की गई थी। बताया जाता है कि बैठक के दौरान प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति और समिति में सामने आ रही कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध हुआ।
कुछ किसानों और किसान प्रतिनिधियों ने समिति के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा खाद वितरण और धान खरीदी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई।
आरोप है कि बैठक के दौरान समिति में कथित गड़बड़ियों पर चर्चा को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। हंगामे के बीच बैठक को लगभग दो घंटे के भीतर स्थगित करना पड़ा।
इस घटनाक्रम के बाद किसानों में नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है। किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि सहकारी समिति किसानों के हितों से जुड़ी संस्था है, इसलिए यहां होने वाले खाद वितरण, धान खरीदी और नियुक्तियों से संबंधित प्रत्येक निर्णय पारदर्शी होना चाहिए।
प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर समिति के प्रस्ताव में सहमति बनाने के प्रयास किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए बैठक की कार्यवाही, प्रस्ताव और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
प्रबंधक बोले—रिकॉर्ड का मिलान होगा, दोषियों पर होगी कार्रवाई
खाद की कमी के मामले में देवभोग जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक नयन सिंह ठाकुर ने कहा कि खाद के स्टॉक में कमी पाई गई है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि समायोजन से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। इसके बाद जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच और कार्रवाई पर टिकी किसानों की नजर
झाखरपारा सहकारी समिति में खाद की कथित कमी और पिछले धान खरीदी सीजन से जुड़े विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती सत्यापन में 10.38 लाख रुपये की खाद का शॉर्टेज सामने आना और अंतिम रिपोर्ट के बाद भी लगभग 5 लाख रुपये का अंतर बने रहने की बात गंभीरता से जांचे जाने की मांग करती है।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी खाद आवंटन, वितरण रजिस्टर, गोदाम के वास्तविक स्टॉक और समायोजन रिपोर्ट का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं।
किसानों की प्रमुख मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो, किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर राहत न मिले और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, खाद की कमी के मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है।


