रक्षाबंधन पर देवभोग पुलिस की अनोखी पहल: ‘खाकी के साथ राखी’ से दिया साइबर सुरक्षा का संदेश
रक्षाबंधन पर देवभोग पुलिस की अनोखी पहल: ‘खाकी के साथ राखी’ से दिया साइबर सुरक्षा का संदेश
रक्षाबंधन पर देवभोग पुलिस की अनोखी पहल: ‘खाकी के साथ राखी’ से दिया साइबर सुरक्षा का संदेश
साइबर जागृति अभियान के तहत महिला पुलिसकर्मियों और ब्रह्माकुमारी बहनों ने नागरिकों, व्यापारियों व पत्रकारों को बांधी साइबर थीम आधारित राखी
देवभोग। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इसी पवित्र भावना को डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साइबर अपराध से जोड़ते हुए थाना देवभोग पुलिस ने एक अनोखी और सराहनीय पहल की। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा संचालित ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत थाना देवभोग परिसर में रक्षाबंधन के अवसर पर ‘खाकी के साथ राखी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
अभियान के तृतीय सप्ताह की गतिविधियों के क्रम में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से रक्षाबंधन के पारंपरिक संदेश—सुरक्षा, विश्वास और जिम्मेदारी—को साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल जागरूकता से जोड़ा गया। कार्यक्रम में लोगों को यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुरक्षा और खुशहाली की कामना करती है, उसी प्रकार आज के डिजिटल दौर में हर नागरिक को स्वयं और अपने परिवार को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए जागरूक और सतर्क रहना आवश्यक है।
महिला पुलिसकर्मियों और ब्रह्माकुमारी बहनों ने बांधी साइबर थीम राखी
कार्यक्रम के दौरान थाना देवभोग में पदस्थ महिला पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ ब्रह्माकुमारी बहनों ने देवभोग क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, व्यापारी संघ के पदाधिकारियों एवं पत्रकार साथियों को विशेष रूप से तैयार की गई साइबर थीम आधारित राखियां बांधीं।
इस दौरान राखी केवल एक पारंपरिक त्योहार का प्रतीक नहीं रही, बल्कि इसके माध्यम से लोगों तक साइबर सुरक्षा का महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाया गया। उपस्थित नागरिकों को बताया गया कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा केवल पुलिस या किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक इंटरनेट और मोबाइल उपयोगकर्ता को सतर्क रहना होगा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में निहित सुरक्षा और विश्वास की भावना को समाज की डिजिटल सुरक्षा से जोड़ना था। साइबर थीम वाली राखी के जरिए यह संदेश दिया गया कि आज के समय में मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों से कराया अवगत
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों, व्यापारी संघ के सदस्यों और पत्रकारों को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
पुलिस ने लोगों को फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, OTP फ्रॉड, UPI ठगी, संदिग्ध लिंक, फर्जी ऑनलाइन ऑफर और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए। बताया गया कि साइबर अपराधी लोगों को डराकर, लालच देकर अथवा किसी प्रकार का झांसा देकर उनकी व्यक्तिगत और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
कई मामलों में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते हैं। वहीं कुछ मामलों में आकर्षक ऑफर, इनाम या निवेश का लालच देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता है।
देवभोग पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन, मैसेज या सोशल मीडिया संदेश पर तुरंत भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक को बिना सत्यापन के क्लिक न करें।
OTP, UPI PIN और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें
कार्यक्रम में विशेष रूप से लोगों को समझाया गया कि OTP, UPI PIN, ATM PIN, बैंकिंग पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
साइबर अपराधी अक्सर लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि उनकी बैंकिंग सेवा बंद होने वाली है, उनका खाता ब्लॉक हो जाएगा या किसी मामले में तत्काल कार्रवाई की जाएगी। ऐसे संदेशों और कॉल से घबराने के बजाय संबंधित संस्था से आधिकारिक माध्यम से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता व्यक्ति को बड़ी आर्थिक ठगी से बचा सकती है।
साइबर अपराध होने पर तत्काल करें 1930 पर शिकायत
कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को साइबर ठगी या किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की जानकारी भी दी गई। लोगों से अपील की गई कि यदि वे किसी साइबर अपराध का शिकार होते हैं तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस ने बताया कि साइबर अपराध की स्थिति में समय पर शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी संबंधित एजेंसियों को सूचना दी जाएगी, उतनी ही जल्दी आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ती है।
स्वयं जागरूक रहने के साथ दूसरों को भी करें जागरूक
‘खाकी के साथ राखी’ कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को साइबर अपराध से स्वयं सुरक्षित रहने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का सामूहिक संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साइबर सुरक्षा केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि एक जागरूक व्यक्ति अपने परिवार और आसपास के लोगों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क करता है, तो कई लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकता है।
थाना देवभोग पुलिस की इस पहल को रक्षाबंधन के अवसर पर सुरक्षा के पारंपरिक संदेश को आधुनिक डिजिटल युग की जरूरतों से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
“राखी का धागा सुरक्षा का वादा, साइबर जागरूकता हर नागरिक की जिम्मेदारी”
देवभोग पुलिस ने रक्षाबंधन के इस पावन पर्व को केवल पारंपरिक उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ‘सुरक्षा के बंधन’ से ‘साइबर सुरक्षा के संकल्प’ तक पहुंचाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा—
“राखी का धागा सुरक्षा का वादा, साइबर जागरूकता हर नागरिक की जिम्मेदारी।”
यह पहल लोगों को यह याद दिलाती है कि जिस प्रकार हम अपने परिवार और प्रियजनों की सुरक्षा के लिए चिंतित रहते हैं, उसी प्रकार डिजिटल दुनिया में भी हमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण और ऑनलाइन गतिविधियों की सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।
पुलिस की आम नागरिकों से अपील
गरियाबंद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल दुनिया में किसी भी अनजान कॉल, मैसेज, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के विश्वास न करें।
पुलिस ने लोगों से कहा है कि—
– किसी भी व्यक्ति को अपना OTP साझा न करें।
– UPI PIN, ATM PIN और बैंकिंग पासवर्ड गोपनीय रखें।
– संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
– फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में घबराएं नहीं।
– किसी भी ऑनलाइन ऑफर या निवेश योजना की पहले सत्यता जांचें।
– साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।
रक्षाबंधन के पवित्र अवसर पर देवभोग पुलिस की ‘खाकी के साथ राखी’ पहल ने सुरक्षा के पारंपरिक संदेश को डिजिटल युग की नई चुनौती—साइबर अपराध—से जोड़ते हुए समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि सतर्कता, जागरूकता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।




