E-PaperUncategorizedगरियाबंदछत्तीसगढ़टॉप न्यूज़

सलाखों के बीच भी नहीं टूटी रिश्तों की डोर: गरियाबंद सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी, भावुक हुए कैदी और परिजन

सलाखों के बीच भी नहीं टूटी रिश्तों की डोर: गरियाबंद सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी, भावुक हुए कैदी और परिजन

प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

सलाखों के बीच भी नहीं टूटी रिश्तों की डोर: गरियाबंद सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी, भावुक हुए कैदी और परिजन

 

रक्षाबंधन पर सेंट्रल जेल में दिखा भाई-बहन के अटूट प्रेम का भावुक नजारा, आंखों में आंसू और दिल में बेहतर भविष्य की दुआ

 

गरियाबंद। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास, स्नेह और सुरक्षा के वचन का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार हर वर्ष परिवारों में खुशियां लेकर आता है, लेकिन इस बार गरियाबंद सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन का दृश्य कुछ अलग ही नजर आया। जेल की ऊंची दीवारों, बंद दरवाजों और लोहे की सलाखों के बीच भाई-बहन के प्रेम ने ऐसा भावनात्मक दृश्य प्रस्तुत किया कि वहां मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

 

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए गरियाबंद सेंट्रल जेल पहुंचीं। बहनों के हाथों में रंग-बिरंगी राखियां थीं, आंखों में वर्षों पुराना अपनापन था और दिल में अपने भाइयों के सुखद एवं बेहतर भविष्य की दुआएं थीं।

 

जेल परिसर में प्रवेश करने से पहले निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद जब बहनों को अपने भाइयों से मिलने का अवसर मिला तो लंबे समय से बिछड़े रिश्तों की भावनाएं एक साथ उमड़ पड़ीं। कई बहनें अपने भाई को सामने देखकर भावुक हो गईं और राखी बांधते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

 

सलाखें रोक नहीं पाईं भाई-बहन के रिश्ते की डोर

 

जेल की चारदीवारी भले ही भाइयों को उनके परिवार और समाज से कुछ समय के लिए दूर कर देती है, लेकिन रिश्तों में बंधे प्रेम और विश्वास को कोई दीवार कैद नहीं कर सकती। गरियाबंद सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन के अवसर पर यही तस्वीर देखने को मिली।

 

बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके सुख, शांति, सुरक्षा तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राखी का यह धागा सिर्फ एक परंपरा नहीं था, बल्कि उसमें बहन की ममता, प्यार, चिंता और भाई के जीवन में अच्छे दिनों की वापसी की उम्मीद बंधी हुई थी।

 

भाइयों के चेहरे पर भी इस मुलाकात की भावुकता साफ दिखाई दी। जिस बहन के हाथों से वे हर साल अपने घर के आंगन में राखी बंधवाते थे, इस बार उसी बहन ने जेल परिसर में उनकी कलाई पर राखी बांधी। परिस्थितियां बदल गई थीं, जगह बदल गई थी, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट और प्यार में कोई कमी नहीं आई थी।

 

भाई की कलाई पर राखी बांधते ही छलक पड़े जज्बात

 

मुलाकात के दौरान कई ऐसे पल सामने आए, जिन्होंने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। किसी बहन की आंखों से आंसू लगातार बहते रहे तो किसी ने मुस्कुराते हुए अपने दर्द को छिपाने की कोशिश की। कई बहनों ने अपने भाइयों को हौसला दिया और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा भी दी।

 

बहनों की आंखों में एक ही उम्मीद दिखाई दे रही थी कि उनके भाई जल्द से जल्द अपने जीवन को नई दिशा दें और परिवार के बीच सम्मान और खुशियों के साथ लौटें।

 

राखी बांधने के बाद कई भाइयों ने भी अपनी बहनों को भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में बेहतर रास्ते पर चलने का प्रयास करेंगे। इस दौरान भाई-बहन के बीच हुई मुलाकात ने यह संदेश दिया कि सच्चे रिश्ते मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान को हिम्मत और नई शुरुआत की प्रेरणा देते हैं।

 

राखी की डोर में बंधी दुआ, प्यार और उम्मीद

 

रक्षाबंधन के दिन बहनों के हाथों में सिर्फ राखी नहीं थी। उस धागे में भाई के लिए प्यार, उसकी सलामती की चिंता और बेहतर भविष्य की अनगिनत दुआएं जुड़ी हुई थीं।

 

कई बहनों ने राखी बांधने के बाद अपने भाइयों की खुशहाली और जीवन में अच्छे दिनों की वापसी के लिए प्रार्थना की। उनके लिए यह मुलाकात सिर्फ त्योहार मनाने का अवसर नहीं थी, बल्कि अपने भाई को यह एहसास दिलाने का भी अवसर था कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, परिवार और रिश्तों का साथ हमेशा उनके साथ रहेगा।

 

जेल प्रशासन ने किए विशेष सुरक्षा इंतजाम

 

रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए गरियाबंद सेंट्रल जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। जेल पहुंचने वाले परिजनों की निर्धारित नियमों के अनुसार जांच की गई और उसके बाद उन्हें मुलाकात की प्रक्रिया के तहत अपने परिजनों से मिलने का अवसर दिया गया।

 

सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए बहनें अपने भाइयों से मिल सकें और उनकी कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मना सकें।

 

त्योहार के दौरान जहां एक ओर जेल की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की सख्ती दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व ने पूरे माहौल को भावनाओं से भर दिया।

 

चारदीवारी के बीच मनाया गया रिश्तों का सबसे खूबसूरत त्योहार

 

गरियाबंद सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन का यह दृश्य एक बड़ा संदेश देकर गया कि रिश्तों को दीवारों में कैद नहीं किया जा सकता और सच्चे प्रेम को सलाखें रोक नहीं सकतीं।

 

भाई की कलाई पर बंधी राखी ने जहां रिश्तों की मजबूती का एहसास कराया, वहीं बहन की आंखों से निकले आंसुओं ने उस प्यार और दर्द को बयां किया, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं है।

 

जेल परिसर में उस दिन किसी बहन के हाथ में राखी थी, किसी की आंखों में आंसू थे और हर दिल में एक ही भावना थी—अपने भाई के लिए सुख, सुरक्षा और अच्छे भविष्य की कामना।

 

रक्षाबंधन के इस भावुक अवसर ने यह साबित कर दिया कि जीवन की कठिन परिस्थितियां भले ही इंसान को अपनों से दूर कर दें, लेकिन दिलों में बसे रिश्तों को कभी खत्म नहीं कर सकतीं। गरियाबंद सेंट्रल जेल में भाई की कलाई पर बंधी राखी और बहन की आंखों में छलकते आंसू इस बात के साक्षी बने कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व की डोर हर दीवार और हर दूरी से कहीं ज्यादा मजबूत होती है।

*हमारे यूट्यूब चैनल Deobhog news express को सब्सक्राइब करें*

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
error: Content is protected !!