प्रयागराज के पर्वतारोही अनंत सिंह ने 7,077 मीटर ऊंचे माउंट कुन पर फहराया तिरंगा
प्रयागराज के पर्वतारोही अनंत सिंह ने 7,077 मीटर ऊंचे माउंट कुन पर फहराया तिरंगा

प्रयागराज के पर्वतारोही अनंत सिंह ने 7,077 मीटर ऊंचे माउंट कुन पर फहराया तिरंगा
गुलाबचन्द्र जायसवाल कि रिपोर्ट
: प्रयागराज के युवा पर्वतारोही एवं पर्वतारोहण प्रशिक्षक अनंत सिंह ने 22 अगस्त 2026 को लद्दाख स्थित माउंट कुन (Mount Kun), 7,077 मीटर की सफलतापूर्वक चढ़ाई कर एक और महत्वपूर्ण पर्वतारोहण उपलब्धि अपने नाम की।
अनंत सिंह ने यह अभियान 13 सदस्यीय जर्मन पर्वतारोहण दल के साथ पूरा किया, जिसमें कुल 9 पर्वतारोहियों ने सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंच बनाई, जबकि अन्य सदस्य अलग-अलग कारणों से शिखर प्रयास पूरा नहीं कर सके।
माउंट कुन का अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड, तेज हवाएं, बदलता मौसम, बर्फीला और तकनीकी भूभाग तथा लंबे समय तक लगातार चढ़ाई ने पर्वतारोहियों की शारीरिक और मानसिक क्षमता की कठिन परीक्षा ली। ग्लेशियर और ऊंचाई वाले तकनीकी हिस्सों में क्रैम्पॉन, रस्सियों और अन्य पर्वतारोहण उपकरणों के साथ सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना पड़ा।
22 अगस्त को शिखर फतह करने के बाद अनंत उसी दिन बेस कैंप लौट आए। शिखर से वापसी के दौरान उनके पैर के अंगूठे में फ्रॉस्टबाइट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे। स्थिति बिगड़ने पर अंगूठे को गंभीर नुकसान होने और भविष्य में अंप्यूटेशन (अंग काटने) तक की आशंका हो सकती थी। खतरे को देखते हुए उन्होंने समय पर शिखर से वापस लौटकर बेस कैंप पहुंचने का निर्णय लिया।
अनंत सिंह इससे पहले Kang Yatse-2 (लगभग 6,250 मीटर) सहित कई हिमालयी अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं और 12 से अधिक हिमालयी अभियानों का अनुभव रखते हैं। वे NIM Uttarkashi में पर्वतारोहण प्रशिक्षक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं तथा पर्वतारोहण, स्कीइंग, सर्च एंड रेस्क्यू और पर्वतीय प्रशिक्षण में विशेषज्ञता रखते हैं।
अनंत सिंह ने कहा, “माउंट कुन का शिखर मेरे लिए केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, अनुशासन और सही समय पर सही निर्णय लेने की परीक्षा थी। शिखर तक पहुंचना जितना महत्वपूर्ण था, उतना ही सुरक्षित वापस लौटना भी जरूरी था।”
उन्होंने अपनी इस सफलता को भारत और विशेष रूप से प्रयागराज के युवाओं के नाम समर्पित करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं, बल्कि अपनी क्षमता को साबित करने का अवसर होती हैं।




