गरियाबंद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को 20-20 साल की सजा, फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट का फैसला
गरियाबंद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को 20-20 साल की सजा, फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट का फैसला

गरियाबंद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को 20-20 साल की सजा, फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट का फैसला
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में दोषी पाए गए दो आरोपियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही मुख्य आरोपी पर विभिन्न धाराओं के तहत अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में न्यायिक कार्रवाई के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार मामले) की पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने सुनाया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। प्रस्तुत तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
बेटी के लापता होने पर पिता ने दर्ज कराई थी शिकायत
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी के अनुसार, मामला 13 सितंबर 2024 का है। उस दिन पीड़िता के पिता ने देवभोग थाने में अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की।
पुलिस की कार्रवाई के दौरान उसी दिन शाम को नाबालिग को मुख्य आरोपी रमजान खान (28 वर्ष) के कब्जे से उसके मित्र अब्दुल रहमान (23 वर्ष) के घर से बरामद किया गया। इसके बाद पीड़िता के कथन के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।
बीएनएस और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था मामला
पीड़िता के बयान और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया।
पुलिस ने विवेचना के दौरान आवश्यक साक्ष्य जुटाए और जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय में हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 13 साक्षियों के बयान दर्ज कराए। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उनके विरुद्ध सजा का आदेश पारित किया।
मुख्य आरोपी को विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा
न्यायालय ने मुख्य आरोपी रमजान खान को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं, धारा 137(2) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
इस प्रकार मुख्य आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग सजाएं और अर्थदंड दिए गए हैं। उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि अलग-अलग सजाएं साथ-साथ चलेंगी या क्रमवार, इसलिए मुख्य आरोपी की कुल प्रभावी सजा की अवधि के संबंध में अतिरिक्त निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है।
दूसरे आरोपी अब्दुल रहमान को भी 20 वर्ष का कारावास
मामले में सहयोगी आरोपी अब्दुल रहमान (23 वर्ष) को भी न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अब्दुल रहमान पर लगाए गए अर्थदंड और उसे दोषी ठहराने वाली प्रत्येक धारा के अंतर्गत सजा का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
13 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना। इसके बाद मुख्य आरोपी रमजान खान और सहयोगी आरोपी अब्दुल रहमान को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।
गरियाबंद जिले के देवभोग थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में न्यायालय के फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के विरुद्ध गंभीर अपराधों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि के बाद कठोर दंड दिया जा सकता है।


