ओड़िशा सीमा पर बसे कोदोमाली के ग्रामीणो को किसी मसीहा का इंतिजार ,,, आदिवासी ग्रामीणों को घुटने तक कीचड़ भरे सड़क में आना-जाना करना मजबूरी
ओड़िशा सीमा पर बसे कोदोमाली के ग्रामीणो को किसी मसीहा का इंतिजार ,,, आदिवासी ग्रामीणों को घुटने तक कीचड़ भरे सड़क में आना-जाना करना मजबूरी
*ओड़िशा सीमा पर बसे कोदोमाली के ग्रामीणो को किसी मसीहा का इंतिजार ,,, आदिवासी ग्रामीणों को घुटने तक कीचड़ भरे सड़क में आना-जाना करना मजबूरी”*
सड़क, पुल पुलिया, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षक जैसे बुनियादी सुविधाओ के लिए तरस रहा यह गांव
गरियाबंद – कहने को इस क्षेत्र की धरती कीमती रत्न हीरा एलेक्जेंडर उगलती है और यहां वन संपदा से भरा क्षेत्र है बावजूद इसके छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 साल बाद भी विकास की रौशनी नही पहुंच पायी है और तो और गांव में पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही पुल पुलिया। 21वीं सदी में जब हम चांद पर जीवन तलाश करने की बात कर रहे है देश और प्रदेश विकास के कई बड़े सौपानो को तय कर चुका है ऐसे समय में आज भी इस क्षेत्र के गांव के लोग रात के अंधेरे दूर करने के लिए लकड़ी के अलाव जलाते है। भले ही शासन प्रशासन लाख विकास के दावे करते न थके लेकिन गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर के बीहड़ जंगल के अंदर बसे ग्राम पंचायत साहेबिनकछार के आश्रित ग्राम कोदोमाली जो ओड़िशा सीमा पर बसा है यहां के मुल निवासी आदिवासी बुनियादी सुविधाओ के लिए तरस रहे है। ग्राम कोदोमाली ओड़िशा सीमा पर बसा है और इस गांव से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर ओड़िशा का प्रथम गांव पड़ता है कोदोमाली की जनसंख्या लगभग 530 के आसपास है और यहां आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में निवास करते है। कोदोमाली पहुंचने के लिए दो रास्ते है एक नेशनल हाइवे 130 सी मैनपुर देवभोग मार्ग बम्हनीझोला से 22 किमी दूर तो दूसरा मार्ग भुतबेड़ा से 11 किमी दूर जंगली रास्तो से होकर जाना पड़ता है। वनांचल में बसे ग्राम कोदोमाली के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओ सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली के लिए तरस रहे है, और तो और छत्तीसगढ राज्य के निर्माण के 25 वर्षो के भीतर आज तक किसी भी पार्टी के विधायक, सांसद और तो और आला अधिकारी भी इस गांव में नही पहुचे है।
*सड़क में घुटने तक दलदल गर्भवती महिलाओ को खाट में ईलाज कराने अस्पताल तक ले जाने मजबूरी*
ग्राम कोदोमाली पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क का निर्माण नही किया गया है बारिश के इन दिनो में कीचड़ और दलदल इतना ज्यादा है कि इस गांव में पहुंचने के लिए मोटर साइकिल भी नही चल पा रही है बारिश के कारण घुटने तक कीचड़ और दलदल के कारण ग्रामीणों को मीलो पैदल दूरी तय करना पड़ रहा है। इस मार्ग के नदी नालो में पुल पुलिया का निर्माण नही हुआ है गांव में स्वास्थ्य की कोई सुविधा नही है बीमार और गर्भवती माताओ को कांवर और खाट में उठाकर अस्पताल मैनपुर लाना पड़ता है।
*ग्रामीणों ने गरियाबंद कलेक्टर से लगाई गुहार हमारे गांव के शिक्षक को बीईओ साहब अपने कार्यालय में रखा है तत्काल भेजा जाए*
ग्राम कोदोमाली प्राथमिक शाला में दर्ज संख्या 60 छात्र -छात्राओ की है पूर्व माध्यमिक शाला में 31 छात्र अध्यनरत है मीडिल स्कूल के एक शिक्षक शिवकुमार साहू को नियम विरूद्ध मूल शाला कोदोमाली को छोड़कर मैनपुर बीईओ बीआरसीसी कार्यालय में अटेचमेन करके रखा गया है जबकि यहां एक शिक्षक होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कई बार हमारे शिक्षक को स्कूल भेजने की मांग कर चुके है लेकिन ब्लाॅक स्तर के अधिकारी ध्यान नही दे रहे है। ग्रामीणों ने गरियाबंद जिले के कलेक्टर श्री बी एस उईके एवं नया जिला शिक्षा अधिकारी से मांग किया है कि कोदोमाली के शिक्षक शिवकुमार साहू को तत्काल उनके मूल शाला कोदोमाली भेजा जाये अन्यथा ग्रामीण आंदोलन करने बाध्य होंगे।
*बिजली नही सौर ऊर्जा प्लांट खराब, पेयजल की गंभीर समस्या*
दूरस्थ वनांचल में बसे ग्राम कोदोमाली में आज तक बिजली नही पहुंची है जबकि इस गांव से महज आधा किलोमीटर ओड़िशा राज्य के प्रथम गांव में चकाचक बिजली की रौशनी चमकते नजर आती है इस गांव में सौर ऊर्जा लगाया गया है लेकिन प्लेट खराब होने के कारण इसका लाभ नही मिल पा रहा है। आज भी रात के अंधेरे दूर करने ग्रामीणों को लकड़ी जलाना पड़ता है वनांचल में बसे इस गांव में पेयजल की गंभीर समस्या है पानी टंकी खराब हो गई है और ग्रामीण दो हैंडपंप से आयरनयुक्त लाल पानी से खाना नही बनने के कारण आज भी झरिया का पानी पीने मजबूर हो रहे है।
*सांसद विधायक और आला अधिकारियो का नाम भी अधिकांश ग्रामीण नही जानते*
ग्रामीण बंशीराम, उदय, बिजमल, गिरधर, शिबो मरकाम, तिलक राम, रोहन, गणेश राम, केसर राम, सोनाधर व ग्रामीणों ने बताया 1998 में तत्कालीन विधायक ओंकार शाह इस गांव में पहुंचे थे उसके बाद से आज तक कोई भी सांसद विधायक एवं कलेक्टर व जिले के आला अफसर आज तक गांव नही पहुंच पाये है। बीहड़ जंगल के अंदर बसे इस गांव के अधिकांश ग्रामीणों को अपने सांसद विधायक का नाम तक नही मालूम सिर्फ हर पांच साल में अपना कीमती वोट देने जाते है और इसी समय इन्हे याद किया जाता है।
*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ग्रामीणों के दिलो में बसे है*
भले ही ग्रामीण सांसद विधायक को नहीं जानते लेकिन ग्राम कोदोमाली में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो दर्जन से ज्यादा पक्का मकान का निर्माण किया जा रहा है साथ ही महतारी वंदन योजना का लाभ ग्रामीण महिलाओ को मिल रहा है जिसके कारण यहां के ग्रामीण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को जानते है और कहते है कि यह पहला प्रधानमंत्री है जो हम गरीबो को पक्का छत दिलाने के बारे में योजना बनाया साथ ही विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री लोगो के दिलो में बसे है।