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प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

भारत देश की सभ्यता संस्कृति पूरी दूनियाँ में पुरातन काल से ही सर्वश्रेष्ठ मानी जाती रही है । हम भारत देश में पैदा हुए और इस ज़मीन पर पले-बढ़े हैं । हम भारत देश के सच्चे और जिम्मेदार नागरिक हैं इसलिए हम ऐसा कोई भी काम न करें कि हमारी वजह से विदेशों में भारत देश का नाम खराब हो और हमारा ये कर्तव्य भी बनता है कि पूरे विश्व भर में हमारे देश का नाम सर्वश्रेष्ठता से बनाऐ रखें ।
सही को सही और ग़लत क गलत ही कहें ।

बड़े अफसोस की बात है कि आज हमारे भारत देश में बहुत से संगठन सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं । सभी के सभी समाज सेवा और सुधार कार्य करने में लगे हुए हैं। आऐ दिन बड़े बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । सरकारों द्वारा जनहित अभियान चलायें जाते हैं । गरीब जनता को फायदा पहूँचाने के लिए सामान वितरण किया जाता है । तो सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना या मजदूरों के लिए योजनाएं बनाई जाती है , किसानों के लिए योजनाएं बनाई जाती है , महिलाओं को योजनाओं का फायदा पहूँचाने जैसे प्रचार प्रसार किया जाता है । लेकिन अफसोस जनक बात है कि देश में बदलाव तो कहीं भी नजर नहीं आ रहा है ।
भ्रष्टाचार , अपराध , रिश्वतखोरी, बलात्कार, धोखाधड़ी, लूट-पाट चारों तरफ़ पैर पसार रहा है । सरेआम सट्टाबाजार हो रहा है और अवैध नशीली दवाएं बेची जाती हैं । एक छोटे-से चपरासी से लेकर बड़े बड़े अधिकारी तक काम कर देनें के बदले में जनता से खर्चा पानी माँग लिया जाता है।
यहांँ तक कि कानून की ही आड़ में ग़ैर क़ानूनी कार्यवाही कर दी जाती है । कानून की आड़ में ही गैर सामाजिक और गैर जिम्मेदाराना होते काम नजर आते हैं । बस फ़र्क इतना ही है कि ये सब सत्ता सिंहासन / नेताओं / बाहुबली की आड़ में और सच का नाकाब ओढ़ कर किया जाता है ।

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