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तेज रफ्तार ने ली मासूम हिरण की जान — जंगल से गांव तक पसरा सन्नाटा

तेज रफ्तार ने ली मासूम हिरण की जान — जंगल से गांव तक पसरा सन्नाटा

प्रधान संपादक खिरसिन्दुर नागेश

तेज रफ्तार ने ली मासूम हिरण की जान — जंगल से गांव  तक पसरा सन्नाटा

 

 

गरियाबंद, NH130C |

तौरेंगा के पास आज सुबह देवोभोग-गरियाबंद मार्ग पर एक मर्मांतक हादसे में एक बेकसूर हिरण की जान चली गई। अज्ञात वाहन की तेज टक्कर से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हिरण का एक पैर पूरी तरह अलग हो गया — यह दृश्य किसी को भी विचलित कर सकता है।

 

यह हादसा उस कड़वे सच को उजागर करता है, जिसे हम अकसर नजरअंदाज कर देते हैं — जंगल खत्म हो रहे हैं, पानी सूख रहा है, और वन्यजीव इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ने को मजबूर हो रहे हैं।

 

रफ्तार और लापरवाही की मिलीभगत

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील घोषित है। जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगे हैं: “धीरे चलें, वन्यजीव क्षेत्र है।” लेकिन सवाल उठता है — क्या कोई इन बोर्डों को पढ़ता भी है? तेज रफ्तार और असावधानी वन्यजीवों के लिए जानलेवा बन चुकी है। अवैध कटाई एट भत्ते और वन अधिकार पेट के नाम पर जंगल का हो रहा सफाई अगर समय रहते हुए इस चीज को अभी से हम अगर ना बचा पाएंगे तो आने वाले दिनों में सभी तरह का जीव जंतु एक फोटो और तस्वीर में ही सिमट के रह जाएगा क्या ऐसी स्थिति में हमारा परिवेश संतुलन सही से बन पाएगा ? क्या बिना पेड़ का हमारा जीवन चल पाएगा ? पेड़ और वन्यजीवों को सिर्फ तस्वीरो में सिमटने से पहले अगर हम नहीं सुधरे तो ,आने वाले हमारे पीढ़ी का भविष्य किस तरह का हो सकता है सोचिएगा जरूर ।

 

वन विभाग की जवाबदेही और अगला कदम

वन विभाग मौके पर पहुंच चुका है। मृत हिरण का पोस्टमार्टम किया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। मगर क्या इतनी कार्रवाई काफी है? विशेषज्ञों की राय है — अब समय है तकनीक का सहारा लेने का। सड़क किनारे सीसीटीवी कैमरे लगाना होगा और जो वन विभाग की स्पेशल सेटेलाइट है उसको भी हमेशा एक्टिव रखना होगा और उन दोषियों को पकड़ कर सख्त कार्रवाई करना होगा जो इस तरह के कार्य के लिए दोषी माने जाते हैं ।

 

जंगल बचेगा, तो जीवन बचेगा

 

वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। यदि जंगल उजड़ते रहे, तो न सिर्फ जानवर, बल्कि इंसान भी संकट में आएगा। जंगलों को बचाना, डाबरी जैसी जल संरचनाओं को भरपूर रखना और इंसानी लालच पर लगाम लगाना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग है।

 

यह हादसा सिर्फ एक हिरण की मौत नहीं है — यह एक चेतावनी है।

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