झरगांव तेतलपारा के कावरिया दंडवत कर पहुंचे शिव मंदिर किये जलाभिषेक
झरगांव तेतलपारा के कावरिया दंडवत कर पहुंचे शिव मंदिर किये जलाभिषेक
झरगांव तेतलपारा के कावरिया दंडवत कर पहुंचे शिव मंदिर किये जलाभिषेक
गरियाबंद विगत 21 जुलाई द्वितीय सोमवार हो गया लेकिन कांवरिया पथ पर शिव मंदिर आने वाले कांवरियों के उत्साह में अभी भी कोई कमी नहीं आई है. बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु अपने सामर्थ के अनुसार नंगे पांव बाबाधाम पहुंचते हैं. कोई कांधा पर कांवर लेकर, तो कोई पैदल, तो कोई हाथ में जलपात्र लेकर बाबाधाम पहुंचते हैं और बाबा पर जलार्पण कर मनोकामना प्राप्त करते हैं. लेकिन इन सभी भक्तों से अलग इन दिनों कांवरिया पथ पर कई ऐसे बम दिखाई दे रहे हैं झरगांव तेतलपारा के कावरियों ने अपने हठयोग का उदाहरण देते हुए दंडवत बाबा के दरबार में पहुंच रहे हैं।
कोई मनोकामना लेकर तो कोई मनोकामना पूर्ण होने पर दंड यात्रा कर रहे हैं
कांवर में गंगा जल भर कर नंगे पांव गंगाधाम से बाबाधाम की कष्टप्रद यात्रा करने की अति प्राचीन परंपरा हैं. कहते हैं कि तप से सिद्धि की प्राप्ति होती है. भक्त कठोर तप कर अपने आराध्य बाबा बैद्यनाथ को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. कोई कांधे पर कांवर लेकर नंगे पांव बाबा धाम पहुंचते हैं. कोई डाक बम बन कर दौड़ते हुए जलपात्र लेकर पहुंचते हैं. जबकि कुछ तो एक कदम और आगे बढ़कर हठयोग का सहारा लेते हुए दंड देते बाबा के दरबार में पहुंचते हैं. इस तरह दंड देते हुए 2किलो मीटर की कांवर यात्रा लगभग 8घंटे तक लगा लेकिन बाबा के इन भक्तों की मानें तो यह शक्ति उन्हें बाबा की अनुकंपा से मिलती है. दंड देते हुए जल लेकर बाबाधाम की इस यात्रा के भी कई नियम हैं जिनका कड़ाई से इनके द्वारा पालन अवश्य किया गया है।
भोलेनाथ ही देते हैं दंडी बमों को शक्ति
आस्था और श्रद्धा से सामर्थ का सृजन होता है और यही इन दंडी शिव भक्त कांवरिया को दंड देते हुए जल लेकर बाबाधाम आने की शक्ति प्रदान करता है. दंडी बम भी मानते हैं कि बाबा की अनुकंपा के बगैर यह कठिन यात्रा संभव नहीं है. इस कठिन यात्रा में इन्हें बहुत परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है लेकिन भोलेनाथ कैसे अपने भक्तों की परेशानी हर लेते हैं ये दंड देने वाले शिव भक्तों को भी महसूस नहीं होता. तभी तो 2 किलोमीटर की कठिन यात्रा 8 घंटे में संपन्न हुई।