जंगल की खामोशी में दब गई दहाड़: गरियाबंद में फिर दो तेंदुए मौत या शिकार ?
जंगल की खामोशी में दब गई दहाड़: गरियाबंद में फिर दो तेंदुए मौत या शिकार ?
जंगल की खामोशी में दब गई दहाड़: गरियाबंद में फिर दो तेंदुए मौत या शिकार ?
छुरा :- गरियाबंद वनमंडल के अंतर्गत आने वाले छुरा और पाण्डुका वन परिक्षेत्र अब जंगली तेंदुओं के लिए कब्रगाह बनते जा रहे हैं। बीते कुछ महीनों में लगातार सामने आ रही तेंदुओं की संदिग्ध मौतों ने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय लापरवाही की भी पोल खोल दी है। ताजा मामला ग्राम पंडरीपानी-भारुवामुड़ा के पेंड्रा बीट क्रमांक 298 के जंगलों से सामने आया है, जहां दो तेंदुओं के शव के अवशेष मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है।
वन विभाग की टीम को घटनास्थल से मृत शव के कुछ हड्डियों के अलावा कुछ अन्य अवशेष बरामद किए गए हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि तेंदुओं के शरीर के कई महत्वपूर्ण हिस्से गायब हैं। इससे शिकार या जहर देकर तेंदुओं को मारने की भी आशंका को बल मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तेंदुए की लाश एक दिन पहले देखी गई थी, लेकिन अगले दिन वह गायब हो गई। इसके बाद दो अलग-अलग स्थानों पर अवशेष मिलने से यह पुष्टि हो रही है कि दो तेंदुए मारे गए हैं।
*वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल*
सूत्रों के अनुसार, शवों के आसपास घसीटे जाने के निशान पाए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि तेंदुओं को मारे जाने के बाद कहीं और ले जाया गया या घसीटा गया। सबसे हैरानी की बात यह है कि जंगल में अवशेष 2-3 दिन तक पड़े रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी। इससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। क्या यह लापरवाही है या फिर जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है?
*बढ़ती मौतों की श्रृंखला से चिंता बढ़ी*
पिछले कुछ महीनों में तेंदुओं की मौत की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। पाण्डुका के सांकरा गांव में दो तेंदुए, छुरा परिक्षेत्र के गनबोरा गांव में एक, मोगरा-चरौदा मार्ग पर एक और उरतुली घाट के पास हाईवे पर एक तेंदुए की मौत हो चुकी है। अब यह दो नई मौतें वन विभाग की लचर व्यवस्था की ओर इशारा कर रही हैं।
*वन विभाग का बयान और संभावित आशंका*
इस संबंध में गरियाबंद के वनमंडलाधिकारी लक्ष्मण सिंह ने बताया कि जांच जारी है और प्रारंभिक आशंका है कि एक तेंदुए के शव को पास ही मौजूद लकड़बग्घे की गुफा की ओर खींचा गया होगा। घटनास्थल के समीप एक गाय का शव भी मिला है, जिसके पेट फटे होने और आसपास तेंदुए के पंजों और नाखूनों के निशान मिले हैं। विभाग ने इस पूरे मामले में सूचना देने वाले को 10 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। सौ बात की एक बात यह है कि इस तरह की लगातार हो रही घटनाएं संकेत देती हैं कि छुरा और पाण्डुका जैसे वन क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण गंभीर संकट में है। यदि जल्द ही कठोर कार्रवाई नहीं की गई और प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र तेंदुओं के लिए सुरक्षित शरणस्थली नहीं, बल्कि कब्रगाह बन जाएगा।